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ग्राम सभा की जमीनों के एक्सचेंज मामले में इलाहाबाद HC ने सरकार से मांगा जवाब, प्रदेश के महाधिवक्ता को नोटिस

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 24 Oct 2026 06:31 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्राम सभा की जमीनों के निजी भूमि से विनिमय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका स्वीकार ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. जनहित याचिका सुनवाई के लिए कोर्ट ने स्वीकार की

  2. हाई कोर्ट में रेवेन्यू कोड की धारा 101 को दी गई चुनौती

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में ग्राम सभा की जमीनों का निजी भूमि से विनिमय (एक्सचेंज) करने की अनुमति देने वाले यूपी रेवेन्यू कोड के प्रावधान को चुनौती देने वाली जनहित याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने सरकार का पक्ष रखने के लिए प्रदेश के महाधिवक्ता को नोटिस जारी करते हुए मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

खंडपीठ ने दिया आदेश

अंतरिम आदेश में कहा गया है कि प्रदेश में ग्राम सभा की जमीनों का कोई एक्सचेंज होता है तो वह इस जनहित याचिका में होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने अधिवक्ता चंद्रशेखर अग्निहोत्री की याचिका पर दिया है।

याची के अधिवक्ता की दलील

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार यादव ने दलील दी कि रेवेन्यू कोड की संशोधित धारा 101 से धारा 77 के तहत सुरक्षित घोषित ग्राम सभा की भूमि प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है और संशोधित प्रावधान गांवों की मूल संरचना को प्रभावित करता है।

अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप 

याचिका में कहा गया कि भू-माफिया इस प्रावधान का लाभ उठाकर ग्राम सभा की कीमती जमीन के बदले कम कीमत वाली अपनी भूमि का एक्सचेंज करा रहे हैं। कोर्ट को बताया गया कि इस काम में अधिकारियों की मिलीभगत है। याचिका में चूंकि यूपी रेवेन्यू कोड की धारा 101 को चुनौती दी गई है, इसलिए कोर्ट ने सीपीसी के प्रावधान के तहत प्रदेश के महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है।

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