विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

SC/ST एक्ट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना अपमानित करने के इरादे के नहीं दर्ज होगा केस, क्या आया फैसला?

Published: Fri, 11 Sep 2026 10:21 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एससी/एसटी एक्ट तभी लागू होगा जब जाति के कारण अपमानित करने का इरादा हो और घटना सार्वजनिक स्थल पर हुई हो।

News Article Hero Image

HighLights

  1. एससी/एसटी एक्ट के लिए अपमानित करने का इरादा जरूरी।

  2. घटना सार्वजनिक स्थल पर होना भी अनिवार्य है।

  3. गाजियाबाद के राजू कुरैशी को एक्ट से मिली राहत।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जब तक किसी विवाद में पीड़ित की जाति के कारण उसे जानबूझकर अपमानित करने का इरादा न हो और घटना सार्वजनिक रूप से नहीं हुई हो तब तक एससी/एसटी एक्ट लागू नहीं हो सकता।

इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने गाजियाबाद में लोनी निवासी आरोपित अपीलार्थी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज को आंशिक राहत देते हुए उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट केस में दर्ज आपराधिक केस रद कर दिया है।

प्रकरण लोनी थाना क्षेत्र के ग्राम बंथला से जुड़ा है। जमीन सौदे के तहत 2.41 लाख रुपये अग्रिम लेकर बैनामा न कर धोखाधड़ी किए जाने तथा एससी-एसटी एक्ट अपराध के आरोप में आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गाजियाबाद की विशेष एससी/एसटी अदालत ने आरोपित के खिलाफ समन जारी किया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

यह भी पढ़ें- वीर अब्दुल हमीद के गांव को सरकार ने दिया तोहफा, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने किया बड़ा एलान

पीठ ने कहा, रिकार्ड और केस डायरी में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो दर्शाता हो कि आरोपित ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया अथवा सार्वजनिक स्थल पर अपमानित किया। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि विशुद्ध रूप से सिविल अथवा संपत्ति विवाद को आपराधिक या जातिगत मोड़ देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

यह भी पढ़ें- 100-200 नहीं; 4500 साल पुरानी हैं मांडी में मिलीं 3000 स्वर्ण मुद्राएं, गंगा घाटी सभ्यता के मिले ऐतिहासिक प्रमाण

कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत समन आदेश निरस्त कर आरोपित को इस कानून से बरी कर दिया, हालांकि धोखाधड़ी और अमानत में खयानत से जुड़ी आपीसी की धाराओं के तहत मुकदमे की सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। आरोपित को दो सप्ताह के भीतर अधीनस्थ अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जमानत याचिका दाखिल करने का भी अवसर दिया है।