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'आधार कार्ड से उम्र साबित नहीं, TC से शादी पंजीयन अवैध', इलाहाबाद HC की विवाह पंजीयन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 26 Oct 2026 08:21 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाह पंजीकरण पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड उम्र का पक्का सबूत ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. बाल विवाह रोकने के लिए हाई कोर्ट ने जारी की नौ सूत्रीय गाइडलाइन

  2. मथुरा निवासी दीपक पाल की अपील पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाह को पंजीयन को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, जन्मतिथि या उम्र का पक्का सबूत नहीं है। और सिर्फ ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के आधार पर पंजीयन नहीं हो सकता।

अगली सुनवाई 27 नवंबर को

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने मथुरा निवासी दीपक पाल की अपील की सुनवाई करते हुए की है। कोर्ट ने यूपी मैरिज रजिस्ट्रेशन रूल्स 2017 में संशोधन होने तक बाल विवाह रोकने के लिए नौ सूत्रीय गाइड लाइन जारी की है। अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।

पंजीकरण अधिकारी ने ड्यूटी पूरी नहीं की

कोर्ट ने कहा, मामले में शादी टीसी और आधार कार्ड के आधार पर रजिस्टर कर दी गई, जबकि आधार उम्र का वैध प्रमाण नहीं है। टीसी, किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में दी गई उम्र साबित करने वाले दस्तावेजों की सूची में शामिल ही नहीं है। टीसी का नियमानुसार सत्यापन भी नहीं किया गया था। ऐसे में पंजीकरण अधिकारी के पास उम्र का कोई सत्यापित सबूत ही नहीं था और उसने अपनी ड्यूटी पूरी नहीं की।

नाबालिग से दुष्कर्म/बाल विवाह का आरोप

मथुरा निवासी अपीलार्थी के खिलाफ नाबालिग से दुष्कर्म/बाल विवाह का आरोप है। हाईस्कूल मार्कशीट के आधार पर उसे सजा हुई है। उसने दो फरवरी 2018 का शादी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिखाकर सजा पर रोक की मांग की है।

यह है कोर्ट की गाइडलाइन

1. लड़के की उम्र 21 और लड़की की 18 साल पूरी न हो तो कोई शादी पंजीकृत न की जाए। शक होने की स्थिति में तुरंत बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी और जिलाधिकारी को सूचना दी जाए।

2. सरकार सुनिश्चित करे कि आनलाइन सिस्टम सिर्फ आधार आथेंटिकेशन से सर्टिफिकेट जारी न करे। दोनों पक्षों की जन्मतिथि का सत्यापन अनिवार्य हो और उसका स्रोत दर्ज हो। सत्यापन अधूरा होने पर अर्जी आगे न बढ़े।

3. उम्र के रिकार्ड के स्पष्ट मानक तय हो। जन्म प्रमाणपत्र और हाईस्कूल के रिकार्ड को प्राथमिकता दी जाए।

4. प्रमुख सचिव, स्टाम्प एंड रजिस्ट्रेशन स्पष्ट निर्देश (एसओपी) जारी करें। पोर्टल पर अधूरे सत्यापन की दशा में सर्टिफिकेट अपने आप रुक जाए।

5. महानिबंधक यह आदेश सभी जिला जजों को भिजवाएं। जिला जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के नाते डीएम, पंजीकरण अधिकारी और बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के साथ बैठक कर इसे लागू कराएं।

6. आइजी रजिस्ट्रेशन, विवाह पंजीकरण अधिकारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम कराएं। इसके लिए न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (जेटीआरआइ) लखनऊ से समन्वय किया जाए।

7. रजिस्ट्रेशन विभाग नियमित निरीक्षण कर रिकार्ड सुरक्षित रखे।

8. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव हर दो महीने में रजिस्ट्रार आफिसों का निरीक्षण करें, पंजीकृत शादियों के सैंपल और उम्र सत्यापन रिकार्ड चेक कर रिपोर्ट जिला जज को भेजें।

9. अनुपालन के लिए आदेश की प्रति प्रमुख सचिव आइजी रजिस्ट्रेशन तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) को भेजी जाए।

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