विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

NEET UG 2026: दिव्यांगता प्रमाण पत्र में गड़बड़ी पर हाई कोर्ट सख्त, छात्र को दिलाया आरक्षण का हक

Published: Sun, 13 Sep 2026 11:52 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नीट यूजी 2026 के दिव्यांग अभ्यर्थी को आरक्षण से वंचित करने वाले मेडिकल बोर्ड के आदेश ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने दिव्यांगता प्रतिशत घटाने का आदेश रद्द किया।

  2. अभ्यर्थी को मूल प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण मिलेगा।

  3. मेडिकल बोर्ड के अधिकार क्षेत्र पर कोर्ट ने सवाल उठाए।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिव्यांग श्रेणी के तहत आरक्षण से वंचित किए गए नीट यूजी 2026 अभ्यर्थी को राहत दी है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड और अपीलीय प्राधिकरण द्वारा दिव्यांगता का प्रतिशत घटाने के आदेश को रद करके अभ्यर्थी को आरक्षण का हक दिलाया। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश आलोक कुमार गुप्ता की याचिका पर दिया।

याचिकाकर्ता आलोक कुमार गुप्ता के पास 30 जून 2025 का स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र था। इसमें उन्हें मानसिक बीमारी से ग्रस्त बताते हुए 55 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित की गई। नीट यूजी-2026 में बेंचमार्क दिव्यांगता श्रेणी के तहत आरक्षण पाने के लिए उन्हें मेडिकल बोर्ड से पात्रता प्रमाण पत्र लेना आवश्यक था।

बोर्ड ने 12 अगस्त को जारी प्रमाण पत्र में यह तो माना कि याचिकाकर्ता पढ़ाई करने में सक्षम है, लेकिन उसकी दिव्यांगता को घटाकर 40 प्रतिशत से कम आंक दिया। इसके बाद मामला अपीलीय प्राधिकरण के पास गया, उसने भी मेडिकल बोर्ड से सहमति जताते हुए दिव्यांगता को घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया।

अदालत ने पाया कि दिव्यांगता के प्रतिशत को घटाना बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। पीठ ने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 प्रमाण पत्र जारी करने और उसके विरुद्ध अपील की प्रक्रिया तय करता है, लेकिन जब तक प्रमाण पत्र को चुनौती नहीं दी जाती, वह मान्य रहता है।

लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां मेडिकल बोर्ड अभ्यर्थी को पढ़ाई के लिए सक्षम तो बताता है, लेकिन साथ ही उसकी दिव्यांगता का स्तर बेंचमार्क (40 प्रतिशत) से काफी कम आंक देता है। इस तरह के प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

पूर्व में पारित सौम्या पाल मामले में दिए गए निर्देश के अनुरूप कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को उसके मूल प्रमाण पत्र में दर्ज दिव्यांगता के आधार पर ही आरक्षित श्रेणी में सीट का दावा करने दिया जाय और अपीलीय प्राधिकरण द्वारा दिया गया आकलन रद किया गया। कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकरण की राय रद कर दी। याचिकाकर्ता को मूल प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षित श्रेणी में सीट दावा करने की अनुमति दे दी है ।

यह भी पढ़ें- 14 सितंबर को प्रयागराज आ सकते हैं CM योगी, वकीलों को बड़ी घोषणाओं की उम्मीद