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हाई कोर्ट का फैसला, पुरानी नियुक्ति रद्द होना बर्खास्तगी नहीं; सहायक अध्यापक की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द

Published: Mon, 21 Sep 2026 07:08 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संतकबीर नगर के सहायक अध्यापक अनिल कुमार की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने सहायक अध्यापक की सेवा समाप्ति रद्द की।

  2. पिछली नियुक्ति रद्द होना बर्खास्तगी के समान नहीं।

  3. वर्तमान नियुक्ति वैध प्रमाणपत्रों पर आधारित होनी चाहिए।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संतकबीर नगर में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत अनिल कुमार की सेवा समाप्ति के आदेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा, पिछली नियुक्ति को फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर रद करना सेवा से बर्खास्तगी नहीं माना जा सकता। अगर वर्तमान नियुक्ति के लिए वास्तविक और वैध शैक्षिक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया था।

ऐसे में केवल पिछली नियुक्ति रद होने की जानकारी न देने के आधार पर वर्तमान (नियुक्ति) की समाप्त नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने यह आदेश अनिल कुमार की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। याची की वर्ष 2015 में सहायक अध्यापक गणित के पद पर नियुक्ति हुई थी। नियुक्ति के दौरान उसके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया गया था। उसने 24 सितंबर 2015 को कार्यभार ग्रहण किया था।

एक वर्ष बाद उसकी सेवा स्थायी कर दी गई थी।वर्ष 2018 में उसके खिलाफ शिकायत की गई कि उसने फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति हासिल की है। इसके बाद वेतन रोक दिया गया। जांच में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीएससी के प्रमाणपत्र सही पाए गए, जबकि वर्ष 2011-12 की बीएड मार्कशीट के सत्यापन की रिपोर्ट लंबित थी। इसके बावजूद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 20 अप्रैल 2019 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थी।

याची ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2004 में उसकी एक अन्य नियुक्ति हुई थी, जिसे बाद में बीएड प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के आधार पर रद कर दिया गया था। हालांकि वर्ष 2015 की नियुक्ति अलग चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी। इसमें उसके द्वारा प्रस्तुत शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया गया था। राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि याची ने पिछली नियुक्ति रद होने और उससे जुड़े तथ्यों को छिपाकर वर्ष 2015 में नियुक्ति हासिल की थी।

इसलिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली, 1981 के नियम 11 के तहत उसकी नियुक्ति समाप्त की गई। कोर्ट ने कहा कि नियम 11 के तहत अयोग्यता उस व्यक्ति पर लागू होती है जिसे राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त किया हो। याची की पिछली नियुक्ति को रद किया गया था, लेकिन उसे किसी विभागीय अनुशासनात्मक आदेश से सेवा से बर्खास्त या पदच्युत नहीं किया गया था। इसलिए पिछली नियुक्ति रद होने को बर्खास्तगी के समान नहीं माना जा सकता।

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