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फैमिली कोर्ट का आदेश 50 हजार रुपये भरण-पोषण दें, इलाहाबाद HC में पति ने कहा- आय ही 40 से 45 हजार

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 22 Oct 2026 05:38 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भरण-पोषण मामले में पति की आय को लेकर विवाद पर नोएडा पुलिस के एसीपी को जांच ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने नोएडा पुलिस के एसीपी को दिया आय की जांच करने का आदेश

  2. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा एसीपी को जांच का आदेश दिया।

  3. फैमिली कोर्ट गौतमबुद्ध नगर के 31 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी गई है

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में पति की आय को लेकर विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा पुलिस के एसीपी को जांच का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने समदर्श चौहान की याचिका पर यह आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।

याची के वकील ने दी दलील

याची ने फैमिली कोर्ट गौतमबुद्ध नगर के 31 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसे पत्नी हर्षिता को 50 हजार रुपये महीना भरण-पोषण देने के लिए कहा गया है। याची के वकील ने दलील दी कि उसके मुवक्किल की आय 40-45 हजार रुपये महीना है, ऐसे में 50 हजार का आदेश गलत है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पति की आय का 25 प्रतिशत ही पत्नी को देना चाहिए। पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा-12 में भी केस किया है, जिसमें 25 मई 2026 के आदेश से 12 हजार महीना देने का आदेश है और वह लगातार दे रहा है। बकाया के तौर पर दो लाख रुपये का आंशिक भुगतान भी कर चुका है।

पत्नी के वकील ने क्या तर्क दिया?

दूसरी ओर पत्नी के वकील ने कहा कि 25 मई 2026 के आदेश में ही दर्ज है कि पति की आय 11 से 12 लाख रुपये महीना है और उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई, इसलिए आय का वह तथ्य अभी भी कायम है।

याची तय 12 हजार रुपये महीना देता रहे

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने थाना सेक्टर-20 गौतमबुद्ध नगर के एसीपी को निर्देश दिया कि वह 25 मई 2026 के आदेश के तथ्यों का सत्यापन कर रिपोर्ट दाखिल करें कि पति की वास्तविक आय क्या है। साथ ही प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, गौतमबुद्ध नगर को निर्देश दिया गया है कि यदि याची द्वारा जमा किए गए दो लाख रुपये अभी तक पत्नी के पक्ष में रिलीज नहीं हुए हैं तो उन्हें रिलीज किया जाए। याची को निर्देश दिया गया कि वह घरेलू हिंसा मामले में तय 12 हजार रुपये महीना लगातार देता रहे।

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