आवारा कुत्तों के हमले पर इलाहाबाद HC सख्त, प्रयागराज और लखनऊ में 'डॉग बाइट हॉटस्पॉट' चिह्नित करने के निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्ती दिखाते हुए प्रयागराज और लखनऊ में 'डॉग बाइट हॉटस्पॉट' चिह्नित करने का आदेश दिया है।

HighLights
हाई कोर्ट ने डॉग बाइट हॉटस्पॉट चिह्नित करने का आदेश दिया।
प्रयागराज और लखनऊ के नगर आयुक्तों को निर्देश जारी।
आक्रामक कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी पर जोर।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। आवारा कुत्तों के हमलों पर अंकुश लगाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज और लखनऊ में डाग बाइट हाटस्पाट चिह्नित करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दोनों शहरों के नगर आयुक्तों को पिछले तीन वर्षों के मामलों और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियों ने कागजों पर कई कदम उठाने की जानकारी दी है, लेकिन उनका जमीन पर कितना असर हुआ है, यह देखना जरूरी है। मामले में अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान याचिका के अनुपालन में हो रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हलफनामों के जरिये पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम, शेल्टर, निगरानी समितियों और पोर्टल की जानकारी दी।
नगर आयुक्तों को क्या दिए निर्देश?
केंद्र सरकार ने संस्थानों की सुरक्षा तथा एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता का ब्योरा दिया, जबकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हाईवे पर गश्त और आवारा पशुओं को हटाने के कदम बताए। हालांकि, एमिकस क्यूरी ने प्रस्तुत आंकड़ों में अंतर और पोर्टल की कमियों पर सवाल उठाए। खंडपीठ ने नगर आयुक्तों को निर्देश दिया कि नगर निगम में दर्ज शिकायतों, डाग बाइट के मामलों और पशु चिकित्सा संबंधी रिकार्ड के आधार पर सालवार व क्षेत्रवार सूची तैयार की जाए।
जिन इलाकों में बार-बार कुत्तों के हमले हुए हैं, उन्हें हाटस्पाट घोषित किया जाए। इसके लिए नए सर्वे का इंतजार नहीं किया जाए। हाटस्पाट के अलावा बड़े अस्पतालों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, बाजारों और पार्कों सहित कम से कम 30 स्थान चिह्नित कर वहां निरीक्षण किया जाए।
अधिकारियों को इन स्थानों पर कुत्तों की संख्या, आक्रामक कुत्तों की पहचान तथा पिछले तीन वर्षों में नसबंदी और टीकाकरण का ब्योरा जुटाना होगा। आक्रामक कुत्तों को प्राथमिकता के आधार पर मानवीय तरीके से पकड़कर एबीसी केंद्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं, जहां उनकी जांच, इलाज, नसबंदी और टीकाकरण होगा। रेबीज के संदिग्ध कुत्तों को अलग रखा जाएगा।
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नगर आयुक्तों को शिकायतों, पकड़े गए कुत्तों और उन्हें भेजे गए केंद्रों का विवरण भी देना होगा। साथ ही संसाधनों व एबीसी केंद्रों की क्षमता की कमी दूर करने की योजना पेश करनी होगी। लखनऊ नगर आयुक्त को लखनऊ माडल और जरहरा प्रशिक्षण केंद्र पर अलग से रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
