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दहेज हत्या के 15 साल पुराने केस में जेल में बंद आरोपित को इलाहाबाद HC से जमानत मिली, पहली जमानत अर्जी खारिज हुई थी

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 15 Sep 2026 07:23 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दहेज हत्या के 15 साल पुराने मामले में करीब दो साल से जेल में बंद अभियुक्त ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाई अभियोजन की लापरवाही

  2. मुजफ्फरनगर का मामला, झूठा फंसाए जाने का आरोप

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दहेज हत्या के 15 साल पुराने मामले में करीब दो साल से जेल में बंद अभियुक्त को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने कहा कि अभियोजन का रवैया अभियुक्त को बिना गलती जेल में रखने वाला है। प्रकरण मुजफ्फरनगर के थाना भौराकला में दर्ज है। आरोपित अजेंद्र की यह दूसरी जमानत अर्जी थी। पहली अर्जी नौ जुलाई 2025 को खारिज हो चुकी थी।

नौ नवंबर 2024 से जेल में है

अभियुक्त के वकील ने दलील दी कि सह-अभियुक्तों को सजा हो चुकी है, लेकिन उनका मुवक्विल निर्दोष है और झूठा फंसाया गया है। वह नौ नवंबर 2024 से जेल में है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं था, विसरा में एल्युमिनियम फास्फाइड मिला है, जो आत्महत्या का संकेत है। घटना के समय वह एक साल के बच्चे के साथ बाहर था।

इस देरी को अभियोजन की लापरवाही मानी

हाई कोर्ट ने ट्रायल की स्टेटस रिपोर्ट मंगाई थी। रिपोर्ट के अनुसार 21 दिसंबर 2024 को आरोप तय हुआ और 21 जुलाई 2026 तक एक भी गवाह की गवाही नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने में एक साल नौ महीने लगे, जबकि जेल में रहने की अवधि दो साल से कम है। इस देरी को अभियोजन की लापरवाही माना गया।

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