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पॉक्सो मामले में अहम सबूत बरामद ना करने पर हाई कोर्ट सख्त, महिला दारोगा पर जुर्माना लगाकर दिए हिरासत के आदेश

Published: Sun, 25 Oct 2026 12:31 AM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाक्सो मामले में मोबाइल फोन बरामद न करने पर महिला दारोगा अनीता वर्मा को पांच हजार ...और पढ़ें

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HighLights

  1. महिला दारोगा को पाक्सो मामले में लापरवाही पर जुर्माना और हिरासत।

  2. मोबाइल फोन बरामद न करने पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी।

  3. हाई कोर्ट ने पीलीभीत के मजदूरों और नोएडा की महिला को भी जमानत दी।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। पाक्सो मामले में आरोपित का मोबाइल फोन बरामद करने में नाकाम महिला दारोगा (विवेचना अधिकारी) अनीता वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शनिवार को शाम चार बजे तक कोर्ट की कस्टडी में रहने और आर्मी वेलफेयर फंड में पांच हजार रुपये जमा करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान विवेचना अधिकारी ने माना कि वह आरोपित का मोबाइल फोन ‘गलती से’ नहीं ले पाई थीं।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने नाबालिग लड़की की अश्लील तस्वीर और वीडियो संपादित कर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करने के आरोपित राज राईन की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया। आरोपित के खिलाफ बीएनएस, पाक्सो एक्ट और उप्र धर्मांतरण निषेध एक्ट, 2021 के तहत कानपुर देहात के मूसा नगर थाने में केस दर्ज है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार डीजीपी ने इस साल जुलाई में सभी पुलिस अधिकारियों को सर्कुलर जारी किया था। इसी पृष्ठभूमि में पीठ ने कहा कि जांच अधिकारी की चूक जांच में लापरवाही है। सेक्शन 183 बीएनएसएस के तहत दर्ज पीड़ित के बयान के अनुसार मोबाइल फोन अहम साक्ष्य था। इसे बरामद न करना ‘कंटेम्प्टस’ है। कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ सख्त टिप्पणी करने से परहेज किया और भविष्य में सावधान रहने की नसीहत के साथ ही पांच हजार रुपये जमा करने का निर्देश दिया।

आदेश में कहा कि वर्मा बाहर नहीं जाएंगी और शाम चार बजे तक कोर्ट की कस्टडी में रहेंगी। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। जमा राशि की रसीद संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष जमा कराने का भी निर्देश दिया गया। जांच में हुई चूक को देखते हुए कोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है।

हाई कोर्ट ने गैंग्सटर एक्ट में दोषी आठ मजदूरों की सजा की निलंबित

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीलीभीत में गैंग्सटर एक्ट के मामले में दोषी ठहराए गए आठ मजदूरों की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने सभी की अंतरिम जमानत जारी रखने की पुष्टि करते हुए मामले की मूल पत्रावली मांग ली है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने अफरोज आलम और सात अन्य की ओर से दाखिल अर्जी स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। पीलीभीत के हजारा थाने की पुलिस ने अफरोज आलम, प्रह्लाद, परितोष, रामभरोसे, मंजूर अली, पिंटू, राम कुमार और राबिन महाजन के खिलाफ गैंग्सटर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।

सेशन कोर्ट ने आठों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए सभी ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की है। सुनवाई के दौरान मजदूरों के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सभी अपनी मांगों को लेकर कभी-कभी धरना-प्रदर्शन करते थे। हत्या के एक मामले में पुलिस के खिलाफ सड़क जाम करने पर उनके विरुद्ध गैंग्सटर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

अधिवक्ता के अनुसार, इस घटना के बाद तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि मजदूरों को पहले मिली अंतरिम जमानत का कभी दुरुपयोग नहीं किया गया। अदालत ने दलीलों को उचित मानते हुए सजा निलंबित कर दी और अपील सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली। साथ ही, पहले से मिली अंतरिम जमानत जारी रखने का आदेश दिया। अब मामले की आगे सुनवाई होगी।

कोरियाई मैनेजर की हत्या में महिला कर्मचारी को हाई कोर्ट से जमानत

नोएडा स्थित लाजिस्टिक कंपनी के कोरियाई मैनेजर की हत्या के मामले में आरोपित पूर्वोत्तर निवासी महिला लुम जियाना पामेई को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। यह मामला गौतमबुद्ध नगर के नालेज पार्क थाने में दर्ज है। कोरियाई नागरिक की चाकू मारकर हत्या की गई थी। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है। आरोपित के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि घटना के दिन मैनेजर और आरोपित साथ थे। आरोपित भी कंपनी में कर्मचारी है। मैनेजर चाकू उठाकर चिल्लाने लगा था। हाथापाई के दौरान गलती से चाकू उसकी छाती में लग गया।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि आरोपित ने ही तुरंत कंपनी के अन्य कर्मचारियों को घटना की सूचना दी और मैनेजर को अस्पताल ले गई, जहां उसकी मौत हो गई। आरोपित का हत्या करने का इरादा नहीं था, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह पांच जनवरी से जेल में है। एजीए ने जमानत अर्जी का विरोध किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि आरोपित ने ही सूचना दी थी और मैनेजर को अस्पताल पहुंचाया था।

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अदालत ने कहा कि घटना का कोई चश्मदीद नहीं है। आरोपित के तुरंत सूचना देने और मैनेजर को अस्पताल ले जाने के आचरण को देखते हुए, इस स्तर पर उसके दुर्घटनावश घटना होने के बचाव को असंभव नहीं कहा जा सकता। महिला होने, आपराधिक इतिहास न होने और लंबी जेल अवधि को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली।