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'फेफड़ों में पानी नहीं मिलने पर भी हो सकती डूबने से मौत', दहेज हत्या के मामले में हाई कोर्ट ने की टिप्पणी

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:45 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि फेफड़ों में पानी न मिलने पर भी दम घुटने से डूबने ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. फेफड़ों में पानी न मिलने पर भी डूबने से मौत संभव।

  2. हाई कोर्ट ने 'ड्राई ड्राउनिंग' के सिद्धांत को स्पष्ट किया।

  3. पुलिस और डॉक्टरों की लापरवाही पर अदालत ने जताई नाराजगी।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेडिकल साइंस के अहम पहलू पर विचार करते हुए कहा कि नदी अथवा पानी में डूबने के बाद यदि किसी व्यक्ति के फेफड़ों और पेट में पानी न मिले, तब भी उसकी मौत डूबने (ड्राई ड्राउनिंग) की वजह से दम घुटने से हो सकती है।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने मेडिकल ज्यूरिसप्रूडेंस की पुस्तकों और विशेषज्ञ राय का हवाला देते हुए केस में नामजद सास जड़वती देवी और ससुर लालजी मौर्य को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामला जौनपुर के जाफराबाद क्षेत्र का है। जहां मृतका के परिजनों ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए सास-ससुर समेत ससुराल पक्ष पर मुकदमा दर्ज कराया था।

सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट देखा गया कि महिला खुद नदी के पुल की तरफ बढ़ी और पानी में छलांग लगा दी। इसके तुरंत बाद उसका पति उसे बचाने के लिए मौके पर पहुंचा। महिला और उसके पति के बीच हुई फोन से बातचीत की रिकार्डिंग से भी आत्महत्या के संकेत मिले। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाक्टरों ने फेफड़ों में पानी न मिलने की वजह से मौत का कारण स्मदरिंग (दम घोंटना) लिख दिया था, जिसके आधार पर जांच प्रभावित हो रही थी।

हाई कोर्ट ने मामले की वैज्ञानिक समीक्षा के लिए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के फारेंसिक मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा.राजेश कुमार राय की सहायता ली। पारिख तथा के.एस. नारायण रेड्डी की मेडिकल किताबों का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि कुल डूबने की घटनाओं में 10 से 20 प्रतिशत मामले ड्राई ड्राउनिंग (शुष्क जल-निमज्जन) के होते हैं, जिनमें पानी की मामूली बूंदें भी गले में प्रवेश करते ही लैरिंजियल स्पाज्म (सांस की नली में ऐंठन) पैदा कर देती हैं।

इसके चलते हवा नली बंद हो जाती है और फेफड़ों में पानी पहुंचे बिना ही सांस रुकने से मौत हो जाती है। अदालत ने पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों की अज्ञानता और गलत राय पर नाराजगी जताते हुए जांच अधिकारी व पुलिस व्यवस्था की लापरवाही पर भी सख्त टिप्पणी की।

घटना के चश्मदीद दो पुलिसकर्मियों (रिक्रूट कांस्टेबल शेषनाथ यादव और होमगार्ड रमेश कुमार यादव) द्वारा जांच अधिकारी के सामने बयान दर्ज न कराने को गंभीर लापरवाही माना गया। कोर्ट ने एसपी जौनपुर को कांस्टेबल के खिलाफ और जिला कमांडेंट होमगार्ड को होमगार्ड जवान के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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