‘लेखपाल भर्ती में दिव्यांगों को आरक्षण से वंचित करना बड़ी गलती', इलाहाबाद HC ने दिए नियुक्ति के आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लेखपाल भर्ती में लोकोमोटर दिव्यांगता को आरक्षण से बाहर करने के सरकारी आदेश को गलत ठहराया है।

लेखपाल भर्ती में दिव्यांगों को आरक्षण से वंचित करना बड़ी गलती: हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने लेखपाल भर्ती में दिव्यांग आरक्षण पर फैसला सुनाया।
लोकोमोटर दिव्यांगता को आरक्षण से बाहर करना गलत ठहराया गया।
22 याचिकाकर्ताओं को छह सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लेखपाल पद की भर्ती में लोकोमोटर (चलने-फिरने संबंधी) दिव्यांगता को आरक्षण से बाहर किए जाने संबंधी सरकारी आदेश को गलत ठहराते हुए 22 याचीगण को नियुक्ति देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय नीतू कुमार और 21 अन्य की याचिका पर सुनाया है।
याचीगण की तरफ से कहा गया कि वे दिव्यांग हैं और केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा नियुक्तियों में आरक्षण और सुविधाएं पाते रहे हैं, लेकिन 30 जुलाई 2021 के शासनादेश से लोकोमोटर दिव्यांगता को लेखपाल पद के लिए आरक्षण से बाहर कर दिया गया।
इसके बाद राज्य सरकार ने 30 सितंबर 2024 को संशोधित शासनादेश जारी कर इस श्रेणी को पुनः शामिल किया, लेकिन तब तक चयन प्रक्रिया में पात्र होने के बावजूद उनको नियुक्ति नहीं मिल पाई थी।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34(1) का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि सरकारी प्रतिष्ठानों में कुल रिक्तियों का कम से कम चार प्रतिशत पद बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए आरक्षित होना चाहिए।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि याचीगण ने चयन प्रक्रिया में बिना विरोध भाग लिया था, इसलिए वे राहत के हकदार नहीं हैं। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार धारा 34(1) के तहत आवश्यक अधिसूचना पेश नहीं कर सकी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि 2021 का आदेश शक्तियों से बाहर जाकर जारी किया गया था। अदालत ने इसे ‘सरकार की गलती’ बताते हुए कहा कि इसका खमियाजा याचीगण को नहीं भुगतना पड़ेगा।
कोर्ट ने आदेश दिया कि कुल 8085 पदों में से एक प्रतिशत आरक्षण पूरा करने के लिए यदि रिक्त पद उपलब्ध हैं तो पात्र याचीगण को उचित समायोजन के जरिए नियुक्ति दी जाए, अन्यथा उनके लिए सुपरन्यूमेरी पद (अस्थायी व अतिरिक्त) सृजित किए जाएं। नियुक्ति प्राधिकारी को छह सप्ताह के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
