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बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, कहा- रोक का कड़ाई से पालन हो

Published: Fri, 11 Sep 2026 10:13 PM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पंजीकरण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

बाल विवाह के पंजीकरण पर हाईकोर्ट सख्त।

बाल विवाह के पंजीकरण पर हाईकोर्ट सख्त।

HighLights

  1. बाल विवाह पंजीकरण पर कड़ाई से रोक का पालन हो।

  2. नाबालिगों के विवाह को पंजीकृत न करने का निर्देश।

  3. उम्र सत्यापन के लिए ऑनलाइन तंत्र विकसित करे सरकार।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पंजीकरण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने कहा है कि बाल विवाह पंजीकरण पर रोक का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।

अदालत ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 का हवाला देते हुए कहा है कि सक्षम प्राधिकारी किसी भी ऐसे विवाह को पंजीकृत नहीं करेंगे, जिसमें कोई भी पक्ष बालक/बालिका की श्रेणी में आता हो (पुरुष के लिए 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष से कम आयु)।

यह आदेश दीपक पाल की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान दिया गया, जो मथुरा की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/पाक्सो एक्ट की विशेष अदालत द्वारा 26 नवंबर 2025 को सुनाए गए फैसले के खिलाफ दाखिल की गई है। प्रकरण आइपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पाक्सो व एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज है।

अपीलकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि घटना के समय पीड़िता वयस्क थी। उसने स्वेच्छा से अपीलार्थी से विवाह किया, जिसे बाद में पंजीकृत भी कराया गया। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विचारण न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर पीड़िता को नाबालिग पाया था और तथ्यों को छिपाकर विवाह पंजीकरण कराया गया। अदालत ने विवाह प्रमाणपत्र जारी करने वाले रजिस्ट्रार को तलब किया।

जांच में पता चला कि उस समय के प्रभारी अधिकारी को यह जानकारी नहीं थी कि विवाह कैसे पंजीकृत हुआ। अदालत ने इसे "गंभीर चिंता का विषय" बताया, खासकर तब जब विभागीय निर्देशों के अनुसार पंजीकरण से पहले वर-वधू की जन्मतिथि सत्यापित करना अनिवार्य है।

कोर्ट ने कहा कि यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिससे विवाह पंजीकरण अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं। कोर्ट ने कहा, पंजीकरण से पहले प्राधिकारी को विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर दोनों पक्षों की उम्र की पुष्टि करनी होगी।

यदि पता चले कि कोई पक्ष निर्धारित उम्र से कम है तो मामला तुरंत संबंधित बाल विवाह निषेध अधिकारी और जिला प्रशासन को भेजा जाए। राज्य सरकार ऑनलाइन विवाह पंजीकरण प्रणाली में ऐसा तंत्र विकसित करे जो उम्र सत्यापन की आवश्यकता वाले आवेदनों को स्वतः चिह्नित कर सके।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसके निर्देशों का यह अर्थ नहीं है कि हर बाल विवाह को स्वतः शून्य माना जाएगा, क्योंकि इसके कानूनी परिणाम बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 3 और 12 के तहत ही तय होंगे। प्रमुख सचिव, स्टाम्प एवं निबंधन विभाग को 30 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर 2026 को होगी।

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