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मिनजुमला गाटा में बिना बंटवारे के हिस्सा तय करने पर हाई कोर्ट सख्त, रायबरेली के डीएम से मांगा जवाब

Published: Fri, 11 Sep 2026 08:41 PM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रायबरेली के मीरजहांपुर गांव में भूमि अधिग्रहण मामले में राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

मिनजुमला गाटा में बिना बंटवारे हिस्सा तय करने पर हाई कोर्ट सख्त।

मिनजुमला गाटा में बिना बंटवारे हिस्सा तय करने पर हाई कोर्ट सख्त।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने रायबरेली भूमि अधिग्रहण मामले में सवाल उठाए।

  2. राजस्व अधिकारियों की मिनजुमला गाटा बंटवारे की कार्यप्रणाली पर आपत्ति।

  3. डीएम और एडीएम को 18 सितंबर को पेश होने का निर्देश।

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रायबरेली के मीरजहांपुर गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी और संबंधित अपर जिलाधिकारी को 18 सितंबर को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की पीठ ने पूछा कि जब संबंधित भूमि मिनजुमला गाटा (संयुक्त या मिला-जुला भूखंड) है और उसका मौके पर भौतिक बंटवारा नहीं हुआ है, तो अधिग्रहित और इस्तेमाल किए गए हिस्से को छह खातों में कैसे निर्धारित कर दिया गया। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इन खातों में याचिकाकर्ताओं के नाम दर्ज नहीं हैं।

मामला सलोन तहसील के मीरजहांपुर गांव स्थित गाटा संख्या 584 (छह) से जुड़ा है। राज्य की ओर से बताया गया कि गाटा की कुछ भूमि का इस्तेमाल अधिग्रहण के निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया है। यह हिस्सा छह खातों में दर्ज बताया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं के नाम उनमें शामिल नहीं हैं।

कोर्ट ने अधिकारियों से याचिकाकर्ताओं के हिस्से की खाली भूमि पर उनके कब्जे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। संभव होने पर भूमि की तस्वीरें और वीडियो भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य ने दावा किया कि याचिकाकर्ता अपनी भूमि खाली होने और किसी हस्तक्षेप न होने से संतुष्ट हैं।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनके साथ न्याय हुआ है और लिखित संतुष्टि देने के लिए उन पर कोई दबाव नहीं बनाया गया। डीएम को हलफनामा दाखिल कर छह खातेदारों को मुआवजा दिए जाने और शेष दो खातों के याचिकाकर्ताओं के नाम होने की स्थिति भी बतानी होगी।

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