'हिरासत में लेने वाले अधिकारी के सामने भी पक्ष रखने का अधिकार बताना जरूरी', इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को हिरासत आदेश जारी करने वाले प्राधिकारी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
हिरासत में लिए व्यक्ति को पक्ष रखने का अधिकार बताना अनिवार्य।
जानकारी न देने पर हिरासत आदेश कानूनी रूप से अमान्य।
हाई कोर्ट ने NDPS एक्ट के तहत बंदी को रिहा किया।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेते समय उसे यह बताना अनिवार्य है कि वह हिरासत आदेश जारी करने वाले प्राधिकारी के समक्ष भी अपना प्रत्यावेदन दे सकता है। इस अधिकार की स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने पर हिरासत आदेश को कानूनी रूप से बरकरार नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने मादक द्रव्य पदार्थ निरोधक एक्ट के तहत जारी हिरासत आदेश को रद करते हुए बंदी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने मीरजापुर निवासी सचिन पटेल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
याची के अधिवक्ता ने बताया कि गांजा बरामदगी के मामले में सचिन को 16 जुलाई को जमानत मिल चुकी थी, लेकिन 23 मई के हिरासत आदेश के तहत उसे निरुद्ध रखा गया। कोर्ट ने आदेश की जांच में पाया कि बंदी को केंद्र सरकार, सलाहकार बोर्ड और राज्य सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन देने की जानकारी तो दी गई थी।
