गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में 2020 से ऑडिट नहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा हलफनामा
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में वर्ष 2020 से ऑडिट न होने पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

HighLights
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में 2020 से ऑडिट नहीं हुआ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा।
निर्देश न मानने पर मुख्य सचिव को उपस्थित होना होगा।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा में वर्ष 2020 से ऑडिट नहीं होने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
निर्देश का पालन नहीं होने पर मुख्य सचिव को स्वयं उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने मुदित कुमार की याचिका पर यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान याची ने कहा कि विवादित राशि पहले से ही विश्वविद्यालय के खाते में दर्ज है। इसके बावजूद वह सदाशयता के तहत 2.70 लाख रुपये तीन दिन में ट्रायल कोर्ट में जमा करने को तैयार हैं।
कोर्ट ने इसकी अनुमति देते हुए धनराशि फिक्स्ड डिपाजिट में रखने का निर्देश दिया। सुनवाई में विश्वविद्यालय में 2020 से आडिट नहीं होने की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि हर वर्ष ऑडिट होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि नए कुलपति ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर ऑडिट कराने का अनुरोध किया है और प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति तत्काल मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया है।
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