2020 दिल्ली दंगा मामला: हाई कोर्ट से पांच दोषियों को झटका, 7 साल कैद की सजा बरकरार
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों में एक युवक की हत्या के मामले में पांच दोषियों को ट्रायल ...और पढ़ें
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दयालपुर थाने में हुई एक प्राथमिकी।
HighLights
दिल्ली दंगे: पांच दोषियों की सात साल की सजा बरकरार।
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
पुलिस कांस्टेबल की गवाही पर कोर्ट ने भरोसा किया।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान 22 वर्षीय युवक की हत्या से जुड़े मामले में पांच दोषियों को सात साल कैद की सजा देने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है।
न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने अमन कश्यप, देविंदर कुमार, प्रदीप राय, आशीष उर्फ गोली और अरुण कुमार की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया।
भारतीय दंड संहिता की धारा
इन सभी को ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना) और 304 भाग-1 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि सुबूतों से पता चलता है कि भीड़ में अपीलकर्ताओं की मात्र उपस्थिति से कहीं अधिक भूमिका थी।
यह मामला दयालपुर थाने में हुई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप था कि 25 फरवरी 2020 को बृजपुरी के पास मोनिश नाम के एक युवक का भीड़ ने पीछा किया और उस पर हमला किया। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
दोषियों ने अपनी अपील में दलील दी थी कि अभियोजन पक्ष के मामले में गवाहों के बयानों में विसंगतियां हैं और पुलिस गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी हुई है। हालांकि, कोर्ट ने एक पुलिस कांस्टेबल की गवाही पर भरोसा किया, जिसने पांचों व्यक्तियों की पहचान हथियारबंद भीड़ के सबसे आगे होने और दूसरों को मोनिश पर हमला करने के लिए उकसाने के रूप में की थी।
