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विदेश में पढ़ाई के नाम पर ऑनलाइन लोन फ्रॉड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, RBI और लोन कंपनियों से मांगा जवाब

Published: Thu, 24 Sep 2026 05:12 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विदेश में पढ़ाई के लिए ऑनलाइन लोन फ्रॉड पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आरबीआई ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. ऑनलाइन लोन फ्रॉड पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त रुख।

  2. आरबीआई और छह कंपनियों से दो सप्ताह में मांगा जवाब।

  3. छात्रा के पिता का सिबिल स्कोर प्रभावित, अगली सुनवाई 13 अक्टूबर।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। विदेश में पढ़ाई के लिए आनलाइन सर्च करने वालों को ओटीपी और वेब लिंक के जरिये लोन के जाल में फंसाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी वल्लभी यादव व राधेश्याम यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए रिजर्व बैंक समेत छह विपक्षियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

इस प्रकरण में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। वल्लभी यादव विदेश में पढ़ाई के लिए कालेज तलाश रही थीं। आनलाइन सर्च के दौरान लेवरेज एजुकेशन कंपनी की काउंसलर याशी तिवारी के जरिये उनको टेकफिनो कैपिटल और पुणे स्थित फाइब कंपनी से ओटीपी तथा वेब लिंक द्वारा लोन दिला दिया गया। कोर्ट में एमिकस क्यूरी प्रवीण कुमार ने बताया कि तमाम कोशिशों के बाद भी उस सत्र में छात्रा को विदेश में एडमिशन नहीं मिला तो उसने लोन कैंसिल करने के लिए कहा।

कंपनी ने कंसल्टेंसी चार्ज काटकर लोन वापस लेने का आश्वासन दिया, लेकिन लोन रद नहीं किया। लोन की किस्त पिता के बैंक खाते से कटनी थी। पिता ने बैंक में स्टाप पेमेंट लगवा दिया। इसके बाद लोन तो कैंसिल हुआ, लेकिन सिस्टम में डिफाल्ट/बैड डेट के रूप में दर्ज हो गया। नतीजन पिता का सिबिल स्कोर 900 से गिरकर 681 पर आ गया। अब खराब सिबिल के कारण बेटी की आगे की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल हो गया है। खंडपीठ ने कहा कि यह सिर्फ एक छात्रा का मामला नहीं है।

आनलाइन कंटेंट सर्च करने पर काल/मैसेज कर ओटीपी या लिंक से सहमति लेना पब्लिक डोमेन की ऐसी प्रवृत्ति है जो आम लोगों को प्रभावित करती है। इस पर गुण-दोष के आधार पर विचार जरूरी है। प्रकरण में निदेशक/प्रबंधक लेवरेज एजुकेशन, काउंसलर याशी तिवारी, प्रबंधक टेकफिनो कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड, प्रबंधक फाइब यूनिट नंबर 404, पुणे, रिजर्व बैंक आफ इंडिया के गवर्नर और पुलिस कमिश्नर के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार प्रतिवादी हैं।

अगस्त में जारी नोटिस सभी को मिल चुके हैं, लेकिन सुनवाई में सिर्फ लेवरेज एजुकेशन की ओर से अभिनव गौर पेश हुए। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (कंप्लायंस) को निर्देश दिया कि याशी तिवारी को सीजेएम गौतमबुद्ध नगर के माध्यम से नोटिस तामील कराया जाए। विपक्षी तीन को कर्नाटक हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और विपक्षी चार को बाम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के जरिये प्रोसेस सर्वर से नोटिस भेजा जाए। एमिकस क्यूरी आरबीआइ के अधिवक्ता को नोटिस सौंपकर निर्देश लें।

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