अब 7 से 9 सीटर निजी वाहनों का हर साल नहीं कराना होगा फिटनेस, RTO के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत
परिवहन विभाग ने सात से नौ सीटों वाले निजी वाहनों के लिए वार्षिक फिटनेस प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।

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HighLights
निजी 7-9 सीटर वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट से छूट मिली।
परिवहन विभाग ने 2005 के पुराने आदेश को रद किया।
प्रतापगढ़ के हजारों वाहन मालिकों को आरटीओ से राहत।
संवाद सूत्र, प्रतापगढ़। अगर आपके पास स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा या सफारी जैसी सात से नौ सीटर वाले वाहन हैं तो अब आपको हर वर्ष आरटीओ दफ्तर के चक्कर काटकर गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं बनवाना होगा। इस झंझट से मुक्ति मिल गई है।
दरअसल, परिवहन विभाग ने वर्ष 2005 में लागू किए गए उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत छह से अधिक और नौ सीटों तक की निजी वाहनों के लिए भी फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य था। हालांकि, यह राहत केवल निजी वाहनों को मिली है।
कमर्शियल सात और नौ सीटर वाहनों पर पुरानी व्यवस्था लागू रहेंगी। मोटर वाहन अधिनियम-1988 और केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 के तहत सुरक्षा मानकों व अन्य कानूनी प्रविधानों का पालन सभी वाहनों के लिए अनिवार्य रहेगा।
परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से जारी नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैर परिवहन यानी निजी वाहनों पर सिर्फ सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस की शर्त थोपना सही नहीं था।
कानूनन केंद्र सरकार के पास ही गैर परिवहन वाहनों के फिटनेस से जुड़े नियम तय करने का अधिकार है। इस कानूनी अड़चन का संज्ञान लेते हुए विभाग ने 12 दिसंबर 2005 वाले आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस नई व्यवस्था से 3218 गाड़ी मालिकों को अब फिटनेस फीस, एजेंट के चक्कर और आरटीओ में लाइन लगाने से राहत मिलेगी।
निजी गाड़ियों के फिटनेस नवीनीकरण से जुड़ी लंबी और जटिल विभागीय प्रक्रियाओं से मुक्ति मिल जाएगी। सात से नौ सीटर वाली पारिवारिक गाड़ियों (जैसे एसयूवी या एमयूवी) को अब गैरजरूरी सरकारी जांच से नहीं गुजरना पड़ेगा।
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क्या हो सकता है नुकसान
फिटनेस जांच न होने से सड़कों पर चल रहीं सात से नौ सीटर पुरानी निजी गाड़ियों की तकनीकी कमियों का पता आसानी से नहीं चल पाएगा। खटारा या खराब हालत वाली गाड़ियों के सड़कों पर बेधड़क दौड़ने से हादसे बढ़ने की आशंका रह सकती है। प्रतापगढ़ में पंजीकृत निजी वाहनों को सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा मिलेगा। इन वाहन मालिकों को अब केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस नहीं कराना होगा।
मुख्यालय से सात से नौ सीट वाले निजी वाहनों को फिटनेस से मुक्त कर दिया गया है। पहले हर वर्ष इन वाहनों का फिटनेस करवाना अनिवार्य था। अब इन्हें इससे राहत मिल जाएगी।
एके शुक्ला, एआरटीओ प्रशासन
