5 किलो मुरब्बे से उपजी 'मिठास' बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, यूपी की दो सहेलियों ने बदली 11 परिवारों की किस्मत
प्रतापगढ़ की दो सहेलियों द्वारा आंवले के मुरब्बे से शुरू किया गया एक छोटा सा प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।

यूपी की दो सहेलियों ने बदली 11 परिवारों की किस्मत।
HighLights
प्रतापगढ़ की सहेलियों ने आंवले के उत्पाद बनाने की शुरुआत की।
सावित्री बाई फुले स्वयं सहायता समूह को पीएम मोदी ने सराहा।
महिलाओं के आत्मनिर्भरता के प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान।
जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। अमृत फल आंवले का महज पांच किलो मुरब्बा बनाकर दो सहेलियों द्वारा की गई छोटी सी शुरुआत मिसाल बन गई। नारी सशक्तीकरण व आत्मनिर्भरता की यह कोशिश प्रधानमंत्री की सराहना के बाद अब राष्ट्रीय फलक पर पहुंच गई है।
प्रतापगढ़ के सावित्री बाई फुले स्वयं सहायता समूह के जरिए परिश्रम करने वाली महिलाओं की चर्चा मोदी ने मन की बात में रविवार को की तो महिलाओं के सपनों को जैसे पंख लग गए।
जिले के रानीगंज तहसील के देवगढ़ कमासिन में संचालित उक्त स्वयं सहायता समूह जुलाई 2020 में अस्तित्व में आया था। गांव की कमलेश कुमारी समेत कुछ महिलाएं बाएफ संस्था में काम करती थीं। यह पशु धन संवर्धन व किसानों के लिए काम करने वाली संस्था थी।
सावित्री बाई फुले के नाम से शुरू किया समूह
इसमें काम करते हुए कमलेश कुमारी व उनकी सहेली सुषमा को लगा कि क्यों न हम लोग भी एक समूह बनाकर स्वयं अपनी तकदीर लिखें। बस यही साेचकर गांव में चर्चा की तो किसी का साथ नहीं मिला। इस पर वह गौरा ब्लॉक गईं। वहां पर आवेदन किया।
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सावित्री बाई फुले के नाम से समूह शुरू किया। यह सब करते हुए उन्होंने सुषमा को सचिव बनाया। समूह में नया मोड़ तब आया, जब 2021 में 1.10 लाख का ऋण लेकर उसे 10 महिलाओं में बराबर बांट दिया। किसी ने बकरी पालन किया तो किसी ने सिलाई की दुकान खोली।
बर्फी बनाने की मशीन भी खरीदी
अमिता, कविता, आशा, मीना, रेखा, ज्योति, मालती, लता, सुमित्रा ने काम शुरू किया और कमलेश-सुषमा आंवले के उत्पाद बनाने में लग गईं। बर्फी बनाने की मशीन 80 हजार व जूस की मशीन 27 हजार में कानपुर से खरीदकर काम को रफ्तार दी। इनकी प्रगति देख बाकी महिलाएं भी आंवले का अचार, जूस, बर्फी, लड्डू बनाने में रुचि लेने लगीं।
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हर महीने 20 हजार से ज्यादा की कर रहीं कमाई
कमलेश स्नातक हैं। यह लोग मास्क, राखी, मोमबत्ती भी बनाती हैं, लेकिन आंवला वरीयता में रहता है। अध्यक्ष कमलेश कुमारी हर महीने 20 हजार से अधिक की कमाई कर रही हैं।
उपायुक्त स्वत: रोजगार देव कुमार का कहना है कि जिले में कई समूह बेहतर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा की गई सराहना से और अच्छा प्रदर्शन करने की ऊर्जा मिली है।
चूल्हा-चौका का काम कर रहीं थीं। बहुत सपने नहीं थे। जब से समूह में जुड़ी समझ बढ़ गई। आंवला उत्पाद बेचकर छोटी जरूरतें पूरी कर लेती हूं।
कविता देवी, सदस्यपहले मैं आंवले के बारे में केवल सुनती थी व मुरब्बा खाना पसंद था। जब इसके उत्पाद बनाने का मौका मिला तो इसकी महत्ता को ठीक से जाना।
आशा विश्वकर्मा, सदस्य
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