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Karpatri Maharaj Death Anniversary : सनातन के पोषक और गोरक्षक थे स्वामी करपात्री महाराज, प्रतापगढ़ से जुड़ी हैं खास यादें

By rajan shukla Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 31 Jan 2026 02:03 PM (IST)

प्रतापगढ़ में जन्मे स्वामी करपात्री महाराज सनातन धर्म के समर्थक और गोरक्षक थे। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे और ...और पढ़ें

Karpatri Maharaj Death Anniversary स्वामी करपात्री महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें आज नमन किया जा रहा है।

Karpatri Maharaj Death Anniversary स्वामी करपात्री महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें आज नमन किया जा रहा है।

HighLights

  1. स्वामी करपात्री महाराज देश की आजादी की लड़ाई में जेल भी गए

  2. गोवध के विरोध में संतों संग संसद के सामने ऐतिहासिक धरना दिया था

जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। Karpatri Maharaj Death Anniversary आंवला नगरी बेल्हा संतों-महंतों की भी धरती है। यहां के भटनी गांव में जन्मे स्वामी करपात्री महाराज सनातन के पोषक व गोरक्षक रहे। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे। उन पर केंद्र सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया है। आज शनिवार को उनकी पुण्यतिथि मनाई जा रही है।

स्वामी करपात्री का बचपन में हरिनारायण था नाम 

Karpatri Maharaj Death Anniversary धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, गोहत्या बंद हो, भारत अखंड हो...जयघोष के जनक स्वामी करपात्री जी महाराज हैं। बचपन में उनका नाम हरिनारायण था। वह आठ-नौ वर्ष की आयु से ही घर से चले गए थे। देश की आजादी की लड़ाई में जेल गए। देश स्वतंत्र होने पर वर्ष 1948 में अखिल भारतीय रामराज्य परिषद बनाया। 

माघ मेला में प्रवचन सुनने उमड़ती थी भीड़ 

Karpatri Maharaj Death Anniversary स्वामी करपात्री महाराज ने प्रवचनों के जरिए सनातन मत का जीवन भर प्रचार-प्रसार किया। प्रयागराज माघ मेले और कुंभ में उनके प्रवचन सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ते थे। वह गोसेवक भी थे। गोवध के विरोध में उनके नेतृत्व में संतों ने नवंबर 1966 को संसद के सामने ऐतिहासिक धरना दिया था। उनके परिवार के शिवराम ओझा भटनी में सवामी करपात्री सेवा संस्थान चलाते हैं। उनकी प्रतिमा लगी है। यहां पर आरती-पूजन होता है।

करपात्री महाराज क्यों कहा जाता था?

Karpatri Maharaj Death Anniversary उनको स्वामी करपात्री इसलिए कहा गया, क्योंकि हाथ में जितना आता था, उतना ही प्रसाद लेते थे। उन्होंने रामायण मीमांसा समेत कई ग्रंथों की रचना की है। शिक्षा क्षेत्र में धर्मसंघ शिक्षा मंडल की स्थापना उनकी ही देन है।

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