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प्रतापगढ़ में किसान सम्मान निधि में 60 करोड़ का गबन मामला: जांच को चार टीमें गठित, फर्जीवाड़ा करने वालों पर शिकंजा

By rajan shukla Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 27 Aug 2026 09:09 PM (IST)

प्रतापगढ़ में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में 60 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है। ...और पढ़ें

प्रतापगढ़ में किसान सम्मान निधि में गबन मामले की जांच चार टीमें करेंगी।

प्रतापगढ़ में किसान सम्मान निधि में गबन मामले की जांच चार टीमें करेंगी।

HighLights

  1. उप कृषि निदेशक की तहरीर पर मुकदमा, पुलिस को सौंपी गई 318846 अपात्रों की सूची

  2. आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा लखनऊ को भी दी जा सकती है जांच की कमान

जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में प्रतापगढ़ में 60 करोड़ के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच के बाद बुधवार को इस प्रकरण में साइबर थाने में कृषि विभाग की तरफ से एक अज्ञात के खिलाफ 60 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी का केस दर्ज कराया गया। पुलिस को तीन लाख से अधिक अपात्रों के नाम की सूची भी सौंपी गई है।

अब गलत ढंग से सरकारी पैसा हजम करने व उनको इसका लाभ देकर अपनी जेब भरने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं एसपी की तरफ से इस फर्जीवाड़े की जांच के लिए साइबर थाने की चार टीमें भी गठित कर दी गई हैं। साथ ही इस केस को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा लखनऊ को भी जांच की कमान दी जा सकती है।

चार साल पहले कुंडा तहसील में योजना की लागिन, आइडी का दुरुपयोग करके सरकारी पोर्टल के विकल्प डायरेक्ट एंट्री के जरिए जालसाजों ने बड़े पैमाने पर खेल किया था। इसमें नाबालिग और अन्य अपात्रों का पंजीकरण इस सरकारी योजना में करवा दिया गया था। यही नहीं इसमें कई दूसरे जिले और प्रांत के लोग भी शामिल थे।

पहले पीएम किसान पंजीकरण तहसील से अग्रसारित होकर जनपद कार्यालय की लागिन पर प्राप्त होता था। चार साल पहले यानी 2021-22 में कृषकों की सुविधा के लिए सरकार ने तहसीलों पर डायरेक्ट एंट्री का विकल्प उपलब्ध करा दिया था। इसी में शातिरों ने सेंध लगाई। इसकी जांच तहसील प्रशासन से लेकर विजिलेंस तक ने की।

बाद में शासन स्तर पर जांच होने व गड़बड़ी की पुष्टि होने पर सख्ती शुरू हुई। शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने इस गंभीर प्रकरण में आरोपितों पर एफआइआर दर्ज करने को कहा। एसपी को पत्र भी लिखा था।

उप कृषि निदेशक अश्वनी कुमार सिंह द्वारा बुधवार यानी 26 अगस्त को साइबर थाने में दर्ज कराए गए केस में कहा गया है कि अब तक 60 करोड़ रुपये से अधिक के दुरुपयोग की आशंका है। इसमें कई लोग शामिल हैं। पुलिस को 318846 अपात्रों की सूची पेन ड्राइव में सौंपी गई है। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि जिस आइडी से लागिन हुई, उसके इंटरनेट प्रोटोकाल (आइपी) एड्रेस को तकनीकी टीमों द्वारा खंगालकर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इस जांच की मानिटरिंग का जिम्मा अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) आइपीएस आलोक कुमार को दिया गया है। बड़े आर्थिक अपराध की जांच की पुलिस की सीमाएं सीमित हैं। यह बड़ा आर्थिक अपराध का केस है, इसलिए इसे ईओडब्ल्यू को जल्दी ही भेजा जाएगा। 

सूची में ज्यादा अपात्र कुंडा तहसील के, 60% बाहरी

पुलिस को सौंपी गई तीन लाख से अधिक अपात्रों की सूची में सबसे ज्यादा अपात्र कुंडा तहसील के हैं तथा 60 प्रतिशत बाहरी हैं। इनमें मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के भी कई नाम शामिल हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनके नाम पोर्टल पर दर्ज हुए, लेकिन सत्यापन अथवा अन्य कारणों से भुगतान नहीं हो सका।

प्रकरण पर एक नजर

2019-20 में पीएम किसान निधि का शुरू हुआ था पंजीकरण
2021-22 में जनसेवा केंद्र और तहसीलदार कुंडा की आइडी हैक कर दर्ज हुए थे फर्जी नाम
2023-24 में कुंडा एसडीएम की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम ने दिए थे जांच के आदेश
2024-25 में विजिलेंस ने शुरू की इस गबन प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच
10 जुलाई 2026 को शासन ने डीएम को कार्रवाई के लिए किया था आदेशित
09 अगस्त को डीएम ने कृषि विभाग व एसपी को लिखा एफआइआर के लिए पत्र 

एक दिन में औसतन तीन हजार की हुई थी फर्जी इंट्री

पीएम किसान सम्मान निधि में फर्जी पंजीकरण का खेल बड़े पैमाने पर हुआ था। जांच में सामने आया कि डायरेक्ट एंट्री के माध्यम से एक दिन में औसतन तीन हजार तक पंजीकरण किए गए। उस समय पंजीकरण की व्यवस्था ओटीपी आधारित थी, जिसका कथित रूप से दुरुपयोग कर अपात्र लोगों के नाम योजना में दर्ज कराए गए। कुंडा तहसील में बड़ी संख्या में ऐसे पंजीकरण होने के बाद मामला जांच के दायरे में आया। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव करते हुए आधार आधारित सत्यापन और बायोमीट्रिक प्रक्रिया को लागू किया गया। अब साइबर थाना पुराने पंजीकरणों और लागिन गतिविधियों की जांच करेगा।

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