यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सदस्यता अभियान के लिटमस टेस्ट में फंसी दिग्गजों की नैय्या
आशुतोष तिवारी प्रतापगढ़ भारतीय जनता पार्टी की तरफ से चल रहे सदस्यता अभियान के लिटमस टे

आशुतोष तिवारी, प्रतापगढ़ : भारतीय जनता पार्टी की तरफ से चल रहे सदस्यता अभियान के लिटमस टेस्ट में दिग्गजों की नैय्या फंस गई है। आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की होड़ में शामिल लोगों का इस लिटमस टेस्ट में पास होना पहली प्राथमिकता होगी। इसमें दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी फंसी है। चुनावी जंग के इस होड़ में प्रतिद्वंद्वी दलों से बाद में, पहले अपने ही लोगों से बाजी अपने हाथ में करनी होगी।
विधानसभा चुनाव सिर पर है। इसमें बढ़त बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी का अक्टूबर माह से सदस्यता अभियान चल रहा है। आम कार्यकर्ता से लेकर सांसद और विधायकों को भी सदस्यता अभियान का लक्ष्य दिया गया है। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा नए लोगों को भाजपा से जोड़ना है। भाजपा के कार्यकर्ता जोश में हैं, उन्हें लगता है कि उनके इस प्रयास से पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार से अधिक मत भाजपा के पक्ष में होंगे। योगी सरकार दोबारा आ जाएगी। इस फार्मूला समझाने के लिए भाजपाई यह तर्क देते हैं कि भाजपा के पास पहले से ही प्रदेश में ढाई करोड़ सदस्य हैं। पिछले चुनाव में तीन करोड़ 30 लाख मत पाकर भाजपा चुनाव जीत गई थी। भाजपा को इस बार प्रदेश में डेढ़ करोड़ नए सदस्य बनाने हैं। इस तरह से प्रदेश में पुराने सदस्यों को जोड़कर भाजपा के पास कुल चार करोड़ सदस्य हो जाएंगे। यानि इतना होने के बाद भाजपा की जीत शत-प्रतिशत सुनिश्चित हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अपने विधायकों से साफ कहा है कि वे सदस्यता अभियान को हल्के में ना लें। उन्हें कम से कम दस कैंप लगाकर इस अभियान को गति देनी है। वहीं टिकट की होड़ में शामिल नए चेहरों को भी सदस्यता अभियान चलाना है, वे भी दस कैंप लगाएंगे। इस तरह से भाजपा ने अपने ही संगठन में टिकट का लालच देकर कार्यकर्ताओं में होड़ मचा दी है। अभी यह अभियान चल ही रहा था कि एक समस्या ने ऐसी रार खड़ी कर दी कि संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को आए दिन पंचायत करनी पड़ रही है। एक ही क्षेत्र में कई पदाधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे सदस्यता अभियान से विवाद पैदा हो रहा है। एक-दूसरे पर आरोप लगाया जा रहा है कि वे एक-दूसरे के प्रभाव के लोगों को अपने सदस्यता अभियान में खींच ले रहे हैं, इससे उनकी सदस्यता अभियान गड़बड़ हो रही है। यह विवाद कई स्थानों पर हो रहा है, जिसे सुलझाने में पार्टी पदाधिकारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कुछ थोड़े विवाद और रस्साकशी के बीच सदस्यता अभियान भी पूरा हो जाना है। सवाल उठ रहा है कि टिकट की होड़ में शामिल नए चेहरों ने अगर सदस्यता अभियान में वर्तमान विधायकों से बढ़त हासिल कर ली, तो क्या पार्टी प्रत्याशी बदल सकती है। हालांकि इस पर कुछ ना बोलते हुए सदस्यता अभियान के जिला प्रभारी रवि गुप्ता कहते हैं पिछले चुनाव में यूपी में भाजपा को तीन करोड़ 30 लाख मत मिले थे। इस बार चार करोड़ सदस्यता हो जाएगी। भाजपा को जीतने से कोई रोक नहीं पाएगा। इसके लिए हम डेढ़ करोड़ नए लोगों को सदस्य बना रहे हैं, इसके साथ ही साथ पुराने ढाई करोड़ सदस्यों का सत्यापन भी किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा सदस्यता अभियान 20 नवंबर तक चलाया जाएगा। वहीं 21 से 30 तक बूथवार सदस्यता अभियान चलेगा। इसमें बूथ अध्यक्ष को 100 सदस्य अनिवार्य रूप से बनाने हैं। अब देखना है कि बाजी किसके हाथ लगती है।
