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Pratapgarh News: उमस भरी गर्मी का मनरेगा पर भी असर, 500 गांवों में कामकाज ठप; करीब दस हजार घटे मजदूर

Pratapgarh News गर्मी का असर मनरेगा कार्यों पर भी पड़ रहा है। जेठ माह की तपती धरा और आसमान से बरसती आग में मनरेगा मजदूर अपना पसीना बहा रहे हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं नहीं है। मनरेगा कार्य स्थल पर श्रमिकों के पीने के लिए ठंडा पानी और न ही छाया की व्यवस्था भी नहीं की है। इससे वह प्रचंड गर्मी में पसीना बहा रहे हैं।

By praveen yadav Edited By: Riya Pandey Sat, 01 Jun 2024 02:42 PM (IST)
Pratapgarh News: उमस भरी गर्मी का मनरेगा पर भी असर, 500 गांवों में कामकाज ठप; करीब दस हजार घटे मजदूर
उमस भरी गर्मी का मनरेगा पर भी असर

संवाद सूत्र, प्रतापगढ़। घर से बाहर निकलते ही चिलचिलाती गर्मी, धूप की हानिकारक किरणों का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। गर्मी में लू लगना, शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं होना बेहद आम है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, बाहर जाने वालों के लिए खतरा उतना ही बढ़ता जा रहा है।

गर्मी से जो वर्ग सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं वह हैं मनरेगा मजदूर। गर्मी का असर मनरेगा कार्यों पर भी पड़ रहा है। जेठ माह की तपती धरा और आसमान से बरसती आग में मनरेगा मजदूर अपना पसीना बहा रहे हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं नहीं है। मनरेगा कार्य स्थल पर श्रमिकों के पीने के लिए ठंडा पानी और न ही छाया की व्यवस्था भी नहीं की है। इससे वह प्रचंड गर्मी में पसीना बहा रहे हैं।

मौजूदा समय में करीब 20 हजार मजदूर कर रहे काम

मौजूदा समय में इस समय 19 हजार 819 मनरेगा मजदूर काम कर रहे हैं। इसमें आसपुर देवसरा ब्लाक के गांवों में 1707, बाबा बेलखरनाथ धाम ब्लाक में 958, बाबागंज में 970, बिहार में 2835, गौरा में 1547, कालाकांकर में 1147, कुंडा में 1223 और लक्ष्मणपुर में 1153 मनरेगा मजदूर काम कर रहे हैं।

साथ ही लालगंज में 530, मंगरौरा में 804, मानधाता में 1410, पट्टी में 1254, सदर में 683, रामपुर संग्रामगढ़ में 1461, संडवा चंद्रिका में 766, सांगीपुर में 741 और शिवगढ़ में 630 मनरेगा मजदूर काम कर रहे हैं। तेज गर्मी और उमस के चलते मजदूरों की संख्या कम हो गई है। पहले इनकी संख्या 30 हजार से अधिक हुआ करती थी।

जिला विकास अधिकारी एवं प्रभारी डीसी मनरेगा राकेश प्रसाद ने बताया कि उमस भरी गर्मी और तेज धूप के चलते मनरेगा का काम प्रभावित हो रहा है। मजदूरों की संख्या भी कम हुई है।

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