संवाद सूत्र, जगेसरगंज : भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने में तालाबों का अहम योगदान होता है, लेकिन अब विडंबना है कि तालाबों का वजूद ही खतरे में हैं। बारिश में जो तालाब पानी से लबालब नजर आते थे, आज उन पर दबंगों का कब्जा है। किसी ने घर बना लिया तो किसी ने उसे पाटकर खेती करने लगे हैंद्य तालाब न होने से बारिश के पानी का संचयन नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासन भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।

जिले के संडवा चंद्रिका ब्लॉक के अंतर्गत उसरी ग्राम पंचायत आती है. राजस्व अभिलेख के मुताबिक गांव में नौ बिस्वा में सरकारी तालाब है. वर्ष 2017-18 में तत्कालीन ग्राम प्रधान राम सजीवन वर्मा ने मनरेगा से करीब 87 हजार रुपए खर्च करके तालाब का सुंदरीकरण कराया था। धीरे-धीरे करके तालाब के आसपास के लोगों ने उसे पाठ कर अपनी जमीन में मिलाकर खेती करने लगे। मौजूदा हालत में पांच बिस्वा में तालाब बचा है. तहसील प्रशासन की उपेक्षा के चलते गांव के तालाब का अस्तित्व खतरे में है. उस पर तहसील के अफसरों व लेखपाल सहित ब्लॉक अफसरों की नजर नहीं पड़ रही है. यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में तालाब का अस्तित्व ही पूरी तरह से मिट जाएगा। जिले भर में इस तरह के कई और तालाब है. जिनका अस्तित्व खतरे में है. मामला संज्ञान में आने के बाद भी प्रशासन कार्रवाई करने से कतराता है.

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तहसील प्रशासन भी है जिम्मेदार

ग्राम पंचायत के तालाब पर हुए अवैध कब्जे के पीछे पूरी तरह से तहसील प्रशासन भी जिम्मेदार है. ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जे को हटाने की जिम्मेदारी लेखपाल सहित तहसील के लेखपालों को दी गई है. लेकिन लेखपाल इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। यही वजह है कि आए दिन सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे होने की शिकायत अफसरों तक पहुंचती रहती है.

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इनसेट---

तालाब पर अवैध कब्जे किए जाने का मामला संज्ञान में आया है, जल्द ही मामले की जांच कराई जाएगी। तालाब को अतिक्रमण से मुक्त किया जाएगा। कब्जेदारो पर भी कार्रवाई होगी।

- मोहनलाल गुप्ता, एसडीएम सदर

Edited By: Jagran