चमरूपुर से स्टैनफोर्ड तक… प्रतापगढ़ के डॉ. दिनेश ने छठी बार रचा इतिहास, बने दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिक
डॉ. दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने लगातार छठी बार स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की दुनिया के शीर्ष दो फीसद विज्ञानियों की सूची में जगह बनाई है।

HighLights
डॉ. दिनेश विश्वकर्मा छठी बार शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की सूची में मिली जगह।
प्रतापगढ़ के चमरूपुर से वैश्विक पहचान तक का सफर।
राजनारायण शुक्ल राजन, प्रतापगढ़। जिले की माटी ने एक बार फिर हीरा उगला है। मानधाता विकासखंड के सुदूर गांव चमरूपुर पठान की धूलभरी पगडंडियों से निकलकर दिल्ली के राजपथ तक का सफर तय करने वाले डॉ. दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने वैश्विक मंच पर तिरंगे की शान बढ़ा दी है।
अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की ओर से जारी 2026 की दुनिया के शीर्ष दो फीसद विज्ञानियों की सूची में डॉ. दिनेश ने लगातार छठी बार जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यह सूची दुनियाभर के वैज्ञानिकों के शोध पत्रों के उद्धरण, उनके प्रभाव और 'सी-स्कोर' के आधार पर तैयार होती है। इसमें जगह बनाना नोबेल के बाद वैज्ञानिक जगत का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।
सीमित संसाधनों में हासिल की शिक्षा
बेहद साधारण और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. विश्वकर्मा ने सीमित संसाधनों में शिक्षा हासिल की। गांव के सरकारी स्कूल से शुरू हुई उनकी पढ़ाई की ललक उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक ले गई। वहां से उन्होंने एमटेक और पीएचडी की डिग्री हासिल की। आज वह दिल्ली सरकार के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय दिल्ली टेक्नोलाजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
डॉ. विश्वकर्मा की धमक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन और ह्यूमन इमोशन एनालिसिस जैसी भविष्य की तकनीकों में है। आसान भाषा में कहें तो वह मशीनों को इंसानों की तरह सोचना और निर्णय लेना सिखा रहे हैं। उनकी तकनीक चेहरे के हावभाव, आवाज और व्यवहार से इंसान के गुस्से, खुशी और दुख को पहचान सकती है। इसका उपयोग सुरक्षा एजेंसियों से लेकर मेडिकल डायग्नोस्टिक्स तक में हो रहा है।
100 से अधिक शोध, हजारों बार उद्धरण
उनकी कलम से अब तक 100 से अधिक उच्च-प्रभाव वाले शोध पत्र आईईईई, स्प्रिंगर और एल्सेवियर जैसे विश्व के टॉप जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। दुनियाभर के विज्ञानी उनके शोध को हजारों बार उद्धृत कर चुके हैं। 2021 से 2026 तक लगातार इस एलीट सूची में बने रहना ही उनके शोध की गुणवत्ता का प्रमाण है।
चमरूपुर से स्टैनफोर्ड तक का यह सफर प्रतापगढ़ के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा-कथा है, जो बताता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो गांव की पगडंडियां भी वैश्विक मंच तक ले जाती हैं।
वर्ष 2026 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं और एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित दुनिया के शीर्ष-2 फीसद विज्ञानियों की सूची में लगातार छठी बार स्थान प्राप्त करना मेरे लिए अत्यंत गर्व और प्रसन्नता का विषय है। मैं इस उपलब्धि को अपने गुरुजनों, परिवार, सहकर्मियों, शोधार्थियों और दिल्ली टेक्नोलाजिकल यूनिवर्सिटी के सहयोगी वातावरण को समर्पित करता हूं। इस उपलब्धि को अपने गांव चमरूपुर पठान और देश के उन सभी युवाओं को समर्पित करता हूं, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सपना देखते हैं।
-प्रो. दिनेश कुमार विश्वकर्मा, विभागाध्यक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, दिल्ली टेक्नोलाजिकल यूनिवर्सिटी।
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