प्रतापगढ़ : उप डाकघर कुंडा में एजेंट से रिश्वत लेने के मामले में सीबीआइ के शिकंजे में फंसे उप डाकपाल व कैशियर को प्रवर डाक अधीक्षक ने निलंबित कर दिया है। दोनों कर्मचारियों का प्रभार अन्य कर्मियों को सौंप दिया गया है। दोनों कर्मचारियों की गिरफ्तारी और उन पर की गई कार्रवाई से कर्मचारियों में खलबली मची है। उधर, शनिवार देर रात तक जांच के बाद दोनों डाक कर्मियों को सीबीआइ टीम अपने साथ लखनऊ ले गई।

संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के धनगढ़ गांव के कुंवर प्रभात सिंह की पत्नी एजेंट शुभा सिंह ने कर्मचारियों के रिश्वत लेने की शिकायत सीबीआइ से की थी। इस पर सीबीआइ की लखनऊ ब्रांच की टीम ने शनिवार दोपहर अचानक उप डाकघर कुंडा में दस्तक दी और रंगे हाथ कैशियर सूरज मिश्र और उप डाकपाल संतोष कुमार को रिश्वत लेते पकड़ लिया। जांच के दौरान कैश में 970 रुपये अधिक मिला, जिसका हिसाब कैशियर व उप डाकपाल नहीं दे सके। जांच के बाद सीबीआइ संतोष को उसके पैतृक आवास पट्टी और शहर में देवकली स्थित आवास पर ले गई। वहां से आने के बाद लखनऊ लेकर चली गई। जांच के दौरान दोनों डाककर्मियों के मोबाइल फोन के सिम को कब्जे में लेते हुए मोबाइल उनके स्वजनों को दे दिया। सीबीआइ अन्य बिदुओं पर भी जांच कर रही है।

प्रवर डाक अधीक्षक केएस वाजपेयी ने बताया कि सीबीआइ द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद कैशियर सूरज मिश्रा और उप डाकपाल संतोष कुमार को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी की जाएगी। उधर, सीबीआइ का छापा रविवार को भी कुंडा बाजार में चर्चा का विषय बना रहा। आरोपित उप डाकपाल संतोष के शहर स्थित आवास पर रविवार को सन्नाटा पसरा रहा। घर पर ताला लटक रहा था।

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करीब 15 घंटे तक चली जांच, सहमे रहे कर्मचारी

कुंडा, प्रतापगढ़ : सीबीआइ टीम ने स्थानीय उपडाकघर में 14 घंटे 45 मिनट तक जांच की। जांच पूरी होने के बाद शनिवार देर रात पौने दो बजे सीबीआइ टीम उप डाकपाल संतोष कुमार व कैशियर सूरज मिश्रा को लेकर लखनऊ रवाना हो गई। इस दौरान भारी संख्या में लोग डाकघर के बाहर जमा रहे।

सीबीआइ की टीम ने शनिवार दोपहर धनगढ़ गांव निवासी कुंवर प्रभात सिंह की पत्नी शुभा की शिकायत पर कुंडा उप डाकघर में छापेमारी की थी। शुभा ने डाक कर्मियों पर आरडी धारकों का पैसा जमा करने के दौरान धन उगाही करने का आरोप लगाया था। जिस पर इंस्पेक्टर अतुल दीक्षित की अगुवाई में सब इंस्पेक्टर संतोष तिवारी व अखिलेश त्रिपाठी समेत छह सदस्यीय टीम उप डाकघर पहुंची थी। जांच के दौरान डाकघर से अभिकर्ताओं व उपभोक्ताओं को बाहर निकाल दिया गया।

इसके बाद रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए कैशियर सूरज मिश्रा को लेकर सीबीआइ टीम उनके गांव ओझा का पुरवा (बसवाही) गई। वहां पर टीम ने करीब तीन घंटे तक जांच की। टीम ने वहां पर मिले कागजात व साक्ष्यों को साथ गए पर्यवेक्षक अवधेश कुमार को गवाह बनाते हुए उसे सीज कर दिया। दूसरी टीम उप डाकपाल संतोष कुमार को लेकर उनके पैतृक गांव पट्टी गई। वहां पर जांच करने के बाद टीम ने साथ गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बृजलाल को गवाह बनाते हुए लिखा पढ़ी की। करीब चार घंटे तक जांच पड़ताल के बाद टीम राम करीब नौ बजे लौटकर कुंडा आई। यहां से सीबीआइ टीम सूरज मिश्र, उप डाकपाल संतोष कुमार को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई।

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शुभा सिंह ने की थी शिकायत :

कुंवर प्रभात सिंह की पत्नी शुभा सिंह उप डाकघर में एजेंट हैं। सीबीआइ के पास की गई शिकायत में शुभा सिंह का नाम उस समय प्रकाश में आया, जब रात करीब डेढ़ बजे कागजी कार्रवाई पूरी होने लगी, तो उस समय शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ी। शुभा सिंह के न होने पर कुंवर प्रभात सिंह ने उनका हस्ताक्षर किया। प्रभात शनिवार दोपहर से सीबीआइ टीम के साथ लगे रहे।

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100 रुपये प्रति लाट देना पड़ा था अतिरिक्त शुल्क :

उप डाकघर में आवर्ती जमा राशि में प्रति लाट 100 रुपये अतिरिक्त जमा कराना कैशियर व उप डाकपाल को महंगा पड़ गया। सीबीआइ से यह शिकायत की गई थी कि 30 हजार रुपये का एक लाट होता है। एक लाट जमा करने के एवज में दोनों कर्मचारी 100 रुपये अधिक मांगते हैं। सीबीआइ टीम के साथ पहुंचे अभिकर्ता शुभा सिंह के पति कुंवर प्रभात सिंह ने शनिवार को ग्राहकों का करीब 10 लाख रुपये जमा किया। जब कैश का मिलान किया गया तो सीबीआइ टीम को मौके पर 970 रुपये अधिक मिला। पूछने पर उक्त पैसे का हिसाब कैशियर नहीं दे सके। सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ टीम पांच दिन से उप डाकघर की कार्यप्रणाली पर पर नजर रखे हुई थी।

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जेठवारा में भी सीबीआइ कर चुकी है कार्रवाई :

कुछ इसी तरह का प्रकरण दो साल पहले जेठवारा उप डाकघर में सामने आया था। ग्राहक व एजेंट की शिकायत पर सीबीआइ ने छापा मारा था। इसमें कई कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की थी। अब दूसरी कार्रवाई सीबीआइ ने कुंडा में की है। इससे एक बार डाकघर चर्चा में आ गया है।

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दमक रही लाखों की इमारत :

रिश्वतखोरी में पकड़े गए उप डाकपाल की लाखों रुपये की इमारत शहर के देवकली में लहलहा रही है। छोटी सी कमाई में इतनी बड़ी इमारत खड़ी करने पर सवाल उठ रहा है। मोहल्ले के लोग भी घटना को लेकर हैरान हैं। आस-पास के लोगों के अनुसार देवकली में बने मकान में दो से तीन नौकर ही रहते हैं, जो इसकी देखभाल करते हैं। परिवार के लोगों का भी आना जाना लगा रहता है।

Posted By: Jagran

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