कुंडा: एक तरफ सरकार शिक्षा को उच्च स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिदिन नए-नए आदेश जारी कर रही है तो वहीं विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों के लिए भेजी गई किताबें विद्यालयों में पहुंचने के बजाय बीआरसी केंद्रों की शोभा बढ़ा रही हैं। कुछ ऐसा ही देखने को मिला कुंडा बीआरसी केंद्र पर। यहां पर कहने को तो 11 न्याय पंचायतों में से आठ न्याय पंचायतों के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकों को पहुंचा दिया गया है, लेकिन वह भी आधी अधूरी पुस्तकें ही पहुंची हैं। जबकि तीन न्याय पंचायत परेवा, अहिबरनपुर व भदरी न्याय पंचायत के 14 विद्यालयों में अभी तक एक भी किताबें नहीं पहुंच सकी है।

कोरोना काल में बंद चल रहे प्राइमरी स्कूलों को एक सितंबर से खोल दिया गया। स्कूल खुले डेढ़ माह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अधिकांश बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैं। जिन विद्यालयों में पुस्तकें पहुंची भी है, उनमें भी कुछ कक्षाओं को छोड़कर बाकी कक्षाओं की किताबें पूर्ण नही है। ऐसे में विद्यालयों में तैनात शिक्षक कल के भविष्य कहे जाने वाले नौनिहालों को आंधी अंधूरी शिक्षा दे रहे है। सबसे बड़ी बात यह है कि बीआरसी केंद्र कुंडा में चलने वाले प्राथमिक विद्यालय में भी कक्षा एक व दो की पूरी किताबें नही मिल सकी हैं। इससे शिक्षकों को शिक्षा देने व छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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जो किताबें आई हैं, उन्हें बीआरसी केंद्र द्वारा वाहन की व्यवस्था कर विद्यालयों में पहुंचाने का काम किया जा रहा है। जल्द ही बाकी बची पुस्तकें भी दूसरे राउंड में विद्यालयों मे पहुंच जाएंगीं।

-रतन लाल, खंड शिक्षा अधिकारी, कुंडा

Edited By: Jagran