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प्रतापगढ़ के अजगरा में उतरा द्वापर युग, यक्षों के सामने आज के युधिष्ठिर; संवाद का अर्थ भी नए सिरे से सामने था

By Gurudeep Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 18 Sep 2026 02:25 PM (IST)

प्रतापगढ़ के अजगरा में 'द ग्रेट अजगरा डिबेट' में यक्ष-युधिष्ठिर संवाद को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। प्रज्ज्वल शुक्ल विजेता और योगेश सिंह और राजेंद्र पटेल उप विजेता रहे।

अजगरा महोत्सव में गुरुवार को सवाल-जवाब के दौरान अपनी बात रखता प्रतिभागी। जागरण।

अजगरा महोत्सव में गुरुवार को सवाल-जवाब के दौरान अपनी बात रखता प्रतिभागी। जागरण। 

HighLights

  1. प्रतापगढ़ के अजगरा में 'द ग्रेट अजगरा डिबेट' का आयोजन।

  2. प्रज्ज्वल शुक्ल 85.83% अंकों के साथ प्रतियोगिता के विजेता बने।

  3. राजेंद्र बहादुर पटेल को 77.33 प्रतिशत अंक के साथ तीसरा स्थान मिला

जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। सरोवर का किनारा, सामने सजा मंच और हजारों निगाहें...कुछ पल के लिए अजगरा में समय जैसे ठहर गया। लगा द्वापर का वह वन फिर जीवंत हो उठा है, जहां यक्ष के सवालों के सामने युधिष्ठिर अकेले खड़े थे। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार सामने धर्मराज नहीं, आज की पीढ़ी के तीन युधिष्ठिर थे और सवाल पूछने वाले एक नहीं छह यक्ष।

प्राचीन अजगरा की उसी ऐतिहासिक माटी पर गुरुवार को ‘द ग्रेट अजगरा डिबेट’ में जब सवाल गूंजा ‘इस संसार में सबसे आश्चर्यजनक क्या है?’ तो जवाब महाभारत के पन्नों से नहीं, आज के समाज की बेचैनियों से निकले। किसी ने लालच में डूबे मनुष्य को आश्चर्य बताया, किसी ने सब कुछ नश्वर जानते हुए भी ‘स्व’ में डूबे रहने को और किसी ने बच्चों के हाथ में मोबाइल देकर उन्हें पढ़ता समझने को। सवाल वही था, युग बदल चुका था और यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का अर्थ भी नए सिरे से सामने था।

अगस्त में जिले की 1148 ग्राम पंचायतों और 279 शहरी वार्डों में खुले संवाद और वाद-विवाद आयोजित किए गए थे। अलग-अलग आयु वर्ग के 1427 प्रतिभागियों में से छह सितंबर को आठ फाइनलिस्ट चुने गए, जिन्हें ‘अजगरा अष्ट’ नाम दिया गया। चयन में केवल वाकपटुता ही नहीं, बल्कि तर्क, चिंतन और सवालों की गंभीरता को समझने की क्षमता भी परखी गई।

आयोजकों के अनुसार इन संवादों के दौरान एक लाख से अधिक लोगों ने प्रश्न पूछे। गुरुवार को हुए संवाद में सबसे सटीक उत्तर दिया 24 वर्षीय पुत्र प्रज्ज्वल शुक्ल ने। उन्होंने कहा कि लालच के कारण वर्तमान और भविष्य दोनों बर्बाद हो सकते हैं, परिवार टूट सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है, फिर भी मनुष्य लालच से नहीं उबरता।

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में परास्नातक प्रज्ज्वल को 85.83 प्रतिशत अंक मिले। उन्हें 1.51 लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।उप विजेता योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि मनुष्य जानता है कि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है, फिर भी वह ‘स्व’ की भावना में डूबा रहता है। उन्हें 84.33 प्रतिशत अंक और एक लाख रुपये मिले।

राजेंद्र बहादुर पटेल को 77.33 प्रतिशत अंक के साथ तीसरा स्थान मिला। उन्होंने बच्चों को मोबाइल देकर उन्हें पढ़ा-लिखा मान लेने और दूसरों से सम्मान की अपेक्षा रखने लेकिन स्वयं सम्मान न देने को आश्चर्य बताया। उन्हें 75 हजार रुपये पुरस्कार दिया गया। अजगरा को पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा स्थल माना जाता है।

मान्यता है कि यहीं उस सरोवर के किनारे यक्ष ने पांडवों से नीतिगत प्रश्न किए थे। नकुल-सहदेव समेत चार पांडव प्रश्नों का उत्तर दिए बिना सरोवर का पानी पीकर अचेत हो गए थे। युधिष्ठिर ने यक्ष के सवालों के उत्तर दिए तो उनके भाइयों को जीवन मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ जिले के प्रभारी मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने किया।

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