प्रतापगढ़: अजगरा में फिर गूंजेंगे 'यक्ष' के सवाल और 'युधिष्ठिर' के जवाब, खुले मंच पर होगी बहस
प्रतापगढ़ में 17 सितंबर को 'द ग्रेट अजगरा डिबेट' आयोजित होगी, जो महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से प्रेरित है। इसका ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
17 सितंबर को प्रतापगढ़ में 'द ग्रेट अजगरा डिबेट' आयोजित होगी।
महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से प्रेरित यह आधुनिक बहस है।
नई पीढ़ी में चिंतन और वाद-विवाद की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। महाभारत में यक्ष के सवालों के सामने खड़े युधिष्ठिर ने सिर्फ अपने भाइयों के प्राण नहीं बचाए थे, बल्कि सवाल पूछने, तर्क करने और सही उत्तर तलाशने की ऐसी परंपरा छोड़ी थी, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। उसी विरासत को आधुनिक मंच देने जा रहा है द ग्रेट अजगरा डिबेट।
17 सितंबर को प्रतापगढ़ में अजगरा की धरती पर होने वाले निर्णायक मुकाबले में आठ प्रखर वक्ता न केवल इस ऐतिहासिक स्थल की महत्ता पर बात करेंगे, बल्कि सत्य-झूठ, कर्तव्य-न्याय, कानून-नैतिकता, करुणा और तकनीक के दौर में मनुष्य की स्वतंत्रता जैसे समकालीन सवालों पर भी तर्क रखेंगे।
जिले की 1148 ग्राम पंचायतों और 279 शहरी वार्डों में अगस्त में खुले संवाद और वाद-विवाद कराए गए। अलग-अलग आयु वर्ग के 1427 प्रतिभागियों में छह सितंबर को आठ फाइनलिस्ट चुने गए, जिन्हें ‘अजगरा अष्ट’ नाम दिया गया है। चयन में केवल वाकपटुता नहीं, बल्कि तर्क, चिंतन और गंभीर सवालों को समझने की क्षमता भी परखी गई। अब तक वाद विवाद में करीब 1 लाख से अधिक लोगों ने प्रश्न पूछे हैं।
यक्ष के सवालों से आधुनिक बहस तक
अजगरा को पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा स्थल माना जाता है। मान्यता है कि यहीं उस सरोवर के किनारे यक्ष ने पांडवों से नीतिगत प्रश्न किए थे। नकुल-सहदेव समेत चार पांडव प्रश्नों का उत्तर दिए बिना सरोवर का पानी पीकर अचेत हो गए थे। युधिष्ठिर ने यक्ष के सवालों के उत्तर दिए तो उनके भाइयों को जीवन मिला।
पृथ्वी से भारी क्या? माता का गौरव। आकाश से ऊंचा कौन? पिता। वायु से तेज क्या? मन। जैसे प्रश्न-उत्तर आज भी इस कथा की पहचान हैं। इसी प्रश्नोत्तर परंपरा को आधुनिक लोकतांत्रिक विमर्श से जोड़ते हुए जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने इसे नए स्वरूप में प्रस्तुत किया है।
उनका कहना है कि अजगरा महासंवाद साझी सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ नई पीढ़ी में चिंतन और वाद-विवाद की संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास है। उनका लक्ष्य अजगरा को बड़े डिबेटिंग सेंटर के रूप में स्थापित करना है।
ये हैं ‘अजगरा अष्ट’अनुपम मौर्य, राजेंद्र बहादुर पटेल, डा. साधना द्विवेदी, प्रज्ज्वल शुक्ल, विवेक सिंह, धीरज कुमार, योगेश प्रताप सिंह और आस्था द्विवेदी फाइनल में अपनी बात रखेंगे। इनमें से तीन विजेताओं को पुरस्कार मिलेगा। प्रथम पुरस्कार 1.51 लाख रुपये है।
