प्रतापगढ़ : जिले में फसल अपशिष्ट जलाने पर बीते वर्ष 11 किसानों पर जहां एफआइआर कराई गई थी, वहीं एक लाख 37 हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला गया था। अवशेष जलाने के सर्वाधिक मामले लालगंज क्षेत्र के रहे। शासन के निर्देश पर कृषि विभाग फसल अवशेष जलाने की घटना को रोकने के लिए कमर कसे हुए है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा फसलों के अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए लगाया गया है।

वर्ष 2020 21 की घटनाओं पर नजर डालें तो जिले के लालगंज क्षेत्र में सर्वाधिक 23 मामले फसल अपशिष्ट जलाने के प्रकाश में आए थे। इसके अलावा कुंडा में 15, पट्टी में सात, रानीगंज में छह मामले इस तरह के मिले। दोषियों से जुर्माने के रूप में एक लाख 37 हजार 500 रुपये वसूले गए। कुल 11 किसानों पर एफआइआर कराई गई, इनमें लालगंज के पांच तथा कुंडा के छह किसान शामिल रहे। वहीं वर्ष 2019-20 में जिले में फसलों के अवशेष जलाने के कुल 39 मामले प्रकाश में आए थे। दोषियों से 65000 रुपये जुर्माना वसूला गया तथा 27 के खिलाफ एफआइआर कराई गई थी।

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जुर्माने की धनराशि

कृषि भूमि का क्षेत्रफल दो एकड़ से कम होने की दशा में ढाई हजार रुपए प्रतिघटना जुर्माना देना पड़ता है। इसी प्रकार कृषि भूमि दो एकड़ से अधिक कितु पांच एकड़ तक होने की दशा में 5000 रुपये प्रति घटना तथा पोच एकड़ से अधिक की भूमि होने की दशा में अर्थदंड 15000 रुपये प्रति घटना की दर से वसूला जाता है। कृषि उप निदेशक रघुराज सिंह का कहना है किसान फसलों के अवशेष खेतों में न जलाएं अन्यथा उन पर जुर्माने के साथ एफआइआर भी कराई जा सकती है।

Edited By: Jagran