न जिम कार्बेट, न दुधवा! यूपी के इस छोटे से जंगल में 80% लोगों को दिखता है बाघ, जानिए क्या है खास
यूपी के इस जंगल में बाघों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जहां 80% पर्यटकों को बाघ आसानी से ...और पढ़ें

अपने शावकों के साथ विचरण करती बाघिन स्रोत: इंटरनेट मीडिया
HighLights
80 वयस्क और 20 शावकों की नहर पटरी व सप्तसरोवर पर अधिक सक्रियता
जंगल में 100 से अधिक भालू और हिरणों के झुंड भी करते हैं विचरण
सृजित अवस्थी, पीलीभीत। वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा प्राप्त करते समय पीलीभीत के जंगल में 24 बाघ थे। अब इनकी संख्या 80 से अधिक हो चुकी। 20 शावक-अव्यस्क बाघ भी विचरण करते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व आकार में जिम कार्बेट (उत्तराखंड) दुधवा नेशनल पार्क (लखीमपुर खीरी) से छोटा है, मगर रोमांच कई गुणा ज्यादा है।
छोटे जंगल में बड़ा कुनबा होने के कारण 80 प्रतिशत पर्यटकों को बाघ दिख जाते हैं। एक नवंबर से टाइगर रिजर्व के द्वार खुल जाएंगे, आइए, आप भी इस रोमांच का अनुभव करिए...।
तराई के जंगल बाघों का सबसे सुरक्षित घर माने जाते हैं। वर्ष 1936 में स्थापित जिम कार्बेट देश का पहला नेशनल पार्क है। 1,318 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल में 260 से अधिक बाघों और हाथियों का रोमांच है।

वहीं, 2,201 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले दुधवा नेशनल पार्क में 135 से ज्यादा बाघ और 53 गैंडे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन दोनों की तुलना में पीलीभीत टाइगर रिजर्व नया और महज 730 वर्ग किलोमीटर के छोटे दायरे में है।
इसके बावजूद, यहां बाघों की आबादी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। वर्ष 2022 की गणना और हालिया आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार यहां 80 वयस्क बाघ-बाघिन और 20 से अधिक शावक मौजूद हैं।
इस उपलब्धि के चलते पीलीभीत टाइगर रिजर्व को टीएक्सटू और कैट्स एक्रेडिशन से नवाजा जा चुका है। कुशल प्रबंधन के लिए प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह को ईको वारियर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।
इस जंगल का छोटा क्षेत्रफल और बाघों का अधिक घनत्व है। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटकों को बाघ समेत अन्य वन्यजीव आसानी से दिख जाते हैं।
सफारी के लिए जोन दो की नहर पटरी और सप्त सरोवर मार्ग सबसे शानदार रूट माने जाते हैं। जलस्रोत पास होने से यहां बाघों का मूवमेंट अधिक रहता है।
वहीं, जोन एक के भीमताल इलाके में भी साइटिंग काफी बढ़ गई है। यहां जंगल की घुमावदार खूबसूरत सड़कों पर बीते सत्र में दो विशालकाय नर बाघ अक्सर एक साथ देखे जाते थे। यह अनोखा नजारा इतना मशहूर हुआ कि पर्यटकों ने इनका नाम करन-अर्जुन रख दिया।
यह जंगल 100 से अधिक भालुओं, कुलांचे भरते हिरणों और 350 से अधिक प्रजातियों के देशी-विदेशी पक्षियों से भी गुलजार रहता है। सर्दी और गर्मी में आने वाले प्रवासी पक्षी यहां बर्ड वाचर्स का रोमांच दोगुणा कर देते हैं।
बाघ संरक्षण की दिशा में हमारे प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। नए पर्यटन सत्र में हम पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विभाग पर्यटकों को सफारी का यादगार अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है।
- मनीष सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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