यूपी में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगेगा ब्रेक; हर साल 15% तेंदुओं की होगी नसबंदी, केंद्र को भेजा गया 610 करोड़ का प्लान
उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने एक नई पहल की है। इसके तहत ...और पढ़ें

एआई इमेज
HighLights
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए की नई पहल, पांच वर्ष में 75 तेंदुओं की होगी नसबंदी
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। जंगल से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में तेंदुओं के हमलावर होने से मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ने लगा। बरेली जोन समेत दुधवा टाइगर रिजर्व और बहराइच क्षेत्र में बड़ी संख्या में तेंदुए आबादी क्षेत्र में पहुंचे और शिकार किया। इसमें कई लोगों की जान गई, जबकि बड़ी संख्या में पालतू पशुओं का शिकार हुआ।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए वन विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया, जिसको केंद्र सरकार भेजा गया। इसके तहत हिंसक और आबादी के लिए खतरा बन चुके तेंदुओं की आबादी को नियंत्रित करने के लिए उनकी नसबंदी की जाएगी।
आगामी पांच वर्षों में प्रदेश में 75 प्रतिशत तेंदुओं की नसबंदी करने का लक्ष्य तय किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो प्रभावित क्षेत्रों में तेंदुओं की आबादी पांच वर्ष में 201 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
वन विभाग बिजनौर के 446 गांवों में 2015 से 2025 के बीच तेंदुओं से सामना होने की 825 घटनाएं हुईं, जिसमें 35 लोगों की मौत और 55 लोग घायल हुए। इनमें वर्ष 2022 के बाद घटनाएं तेजी के साथ बढ़ीं।
उत्तरी खीरी वन प्रभाग के आसपास 17 तेंदुए पकड़े गए और हमलों में सात लोगों की मौत हुई। बहराइच में कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य और वन प्रभाग के आसपास के गांवों से अप्रैल से 15 अक्टूबर के बीच 26 तेंदुए पकड़े गए।
हमलों में 10 लोगों की जान गई। पीलीभीत में भी तेंदुओं ने जंगल के बाहर निकलकर हमले किए, लेकिन किसी की जान नहीं गई। हालांकि, पालतू पशुओं की जान जरूर चली गई।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघों की संख्या अधिक होने की वजह से तेंदुए जंगल से बाहर गन्ने, धान के खेतों को ठिकाना बनाते हैं। इसी तरह कार्बेट, राजाजी, अमानगढ़, दुधवा, कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व में बाघों संख्या बढ़ने से तेंदुए आबादी क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
वन विभाग के कर्मचारी रेस्क्यू करके तेंदुओं को जंगल में छोड़ देते हैं, जबकि वे शिकार की तलाश में फिर गांवों और गन्ने के खेतों में लौट आते हैं। प्रदेश के चिड़ियाघरों में भी जगह नहीं बची है। ऐसे में आने वाले पांच वर्षों की स्थिति का आकलन करके रिपोर्ट तैयार की गई।
बरेली जोन के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम ने यह प्रस्ताव पीलीभीत के साथ ही बहराइच, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के लिए तैयार किया गया।
यह प्रस्ताव प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमूरी को सौंपा गया, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत तेंदुओं की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया।
मुख्य वन संरक्षक के अनुसर तेंदुए वर्ष भर प्रजनन करते हैं और मादा तेंदुए 90 से 105 दिनों के गर्भकाल के बाद हर 21 महीने में दो से चार शावकों को जन्म देती हैं। शावकों की मृत्यु दर लगभग 20 प्रतिशत है।
प्रदेश में नर और मादा तेंदुए लगभग बराबर हैं। इस वजह से तेंदुओं की आबादी तेजी से बढ़ रही है। वन विभाग ने 610 करोड़ रुपये से अधिक की योजना बनाई, जिसमें बस्तियों की सुरक्षा के लिए भौतिक अवरोध बनाने का प्रस्ताव है।
ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे प्रभावित न हों। इसमें 2.74 करोड़ रुपये की लागत से विशेष वन्यजीव सर्जिकल अस्पताल बनाने की योजना है। इसमें आपरेशन थिएटर, स्क्वीज केज और देखभाल केंद्र होंगे।
तेंदुओं की आवाजाही पर नजर रखने के लिए थर्मल कैमरे जिला कमांड सेंटर से जोड़े जाएंगे। योजना लागू करने से पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया से सुझाव मांगा गया।
यह भी पढ़ें- बाघों के जंगल में मिला अनोखा शिकारी, पानी में गोता लगाकर करता है शिकार; खूबियां जानकर हो जाएंगे हैरान
