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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 10, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चालीस साल पहले हुई थी बेहरीखेड़ा में बाघ की घटना

By JagranEdited By:
Published: Thu, 10 Aug 2017 05:52 PM (IST)

जागरण संवाददाता, पीलीभीत : देवहा नदी के तटीय इलाके में बेहरीखेड़ा गांव बसा है, जो बाघ के

चालीस साल पहले हुई थी बेहरीखेड़ा में बाघ की घटना
चालीस साल पहले हुई थी बेहरीखेड़ा में बाघ की घटना

जागरण संवाददाता, पीलीभीत :

देवहा नदी के तटीय इलाके में बेहरीखेड़ा गांव बसा है, जो बाघ के लिए मुफीद माना जाता है। इसी गांव में चालीस साल पहले बाघ हमले की घटना हुई थी, जिसमें ग्रामीण लीलाधर की जान चली गई थी, उसके बाद अब यह घटना हुई है।

जनपद की भौगोलिक पृष्ठभूमि वन और वन संपदा बाहुल्य है। यहां के जंगल में लुप्तप्राय बाघ काफी संख्या में पाए जाते हैं। इन बाघों के संरक्षण की दिशा में देश-दुनिया में प्रयास किए जा रहे हैं। हर साल भारीभरकम बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन कोई सार्थक काम नहीं हो पा रहे हैं। टाइगर रिजर्व की खुली सीमाएं होने की वजह से बाघ बाहर आ रहे हैं। नवंबर से लेकर अब तक 18 लोग बाघ हमले का शिकार हो चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। वर्ष 2012 से बाघ परिवार अमरिया के आबादी वाले इलाके में विचरण कर रहा है। पिछले कुछ समय से बाघ के स्वभाव में बदलाव आया। यह बाघ तीन ग्रामीणों को निवाला बना चुका है। सामाजिक वानिकी क्षेत्र में बेहरीखेड़ा गांव के खेत में बाघ हमले की तीसरी घटना हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, बेहरीखेड़ा गांव में चालीस साल पहले बाघ हमले की घटना हुई थी, जिसमें ग्रामीण लीलाधर सागर निवाला बना था। बाघ हमले के बाद मृतक कुंवरसेन के परिवार में कमाने वाला कोई नहीं रहा। बच्चों के सहारे ही परिवार रह गया है।

पीड़ित परिवार को नहीं मिली अहैतुक सहायता

बेहरीखेड़ा गांव के किसान कुंवरसेन की बाघ हमले में मौत के बाद परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। वन विभाग की ओर से पीड़ित परिवार को किसी प्रकार की अहैतुक सहायता नहीं दी गई।

देवहा का तटीय इलाका बाघ के लिए सुरक्षित

अमरिया क्षेत्र के गांव बेहरीखेड़ा के पास प्रवाहित हो रही देवहा नदी बाघों के लिए सुरक्षित ठिकाना हो सकता है। नदी किनारे झाड़ियों के साथ ही गन्ने के खेत मौजूद हैं। ऐसे में नदी के तटीय इलाके में बाघ अपना डेरा जमा सकता है। इस वजह से ग्रामीणों को सतर्कता से रोजमर्रा के कामकाज निपटाने होंगे।