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रुहेलखंड में तेंदुओं का आतंक: ढाई महीने में 42 रेस्क्यू, 8 को मिली 'उम्रकैद' और 7 का इंतजार कर रही 'सलाखें'

Published: Sat, 19 Sep 2026 06:00 AM (IST)

रुहेलखंड जोन में जुलाई से सितंबर के बीच 42 तेंदुए पकड़े गए, जिनमें से 8 को चिड़ियाघरों में भेजा गया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रुहेलखंड जोन और बहराइच में एक जुलाई से 15 सितंबर तक पकड़े गए 42 तेंदुए

पीयूष दुबे, पीलीभीत। रुहेलखंड जोन के बरेली- मुरादाबाद मंडल जिले में 800 तेंदुए हैं। इनमें कई तेंदुए जंगल किनारे खेतों में छिपकर रहते हैं, मगर वहां वर्षा का पानी भरने से गांवों में घूम रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर जुलाई से अब तक जोन में 42 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। इनमें आठ को चिड़ियाघरों में कैद किया जा चुका, सात अन्य को वहां छोड़ने के आदेश का इंतजार है।

शेष 25 को दोबारा जंगल में छोड़ा, मगर वहां रुके रहेंगे, इस पर संदेह है। यही नहीं, एक तेंदुए की पकड़ने के बाद मृत्यु हो गई। एक टाइगर के बारे में जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी।

रुहेलखंड के बिजनौर जिले में सर्वाधिक 444 तेंदुए हैं। इसके अलावा मुरादाबाद, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली रामपुर समेत अन्य जिलों में तेंदुओं की संख्या अच्छी है, जो लगभग 800 के करीब होने का अनुमान है।

वर्षा ऋतु में जंगल के अंदर, गन्ने के खेतों और तराई में पानी भरने की वजह से तेंदुए अक्सर ऊंचे और सूखे स्थानों की ओर पहुंचने लगते हैं। यही वजह है कि इन दिनों बिजनौर, मुरादाबाद, पीलीभीत समेत अन्य जिलों में तेंदुए लगातार नजर आ रहे हैं।

इनको पकड़ने के लिए वन विभाग की टीमों को लगाया गया, जो पिंजरों को रख रही हैं। पीलीभीत के छह गांवों में तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए गए, जिनमें एक जुलाई से लेकर 15 सितंबर तक एक भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया।

लेकिन अब तक बिजनौर में 21 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है। इसी तरह मुरादाबाद में 13, कतर्नियाघाट बहराइच में सात और शाहजहांपुर में एक तेंदुआ पकड़ा जा चुका है।

इन तेंदुओं को इटावा लायन सफारी, नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान लखनऊ, कानपुर प्राणी उद्यान, रानीपुर टाइगर रिजर्व चित्रकूट, अमानगढ़ वन क्षेत्र में छोड़ा गया, जबकि सात तेंदुओं को छोड़ने के लिए अनुमति का इंतजार है।

इसमें कुछ मुरादाबाद में भी पिंजरों में रखे गए। लेकिन, अब वन विभाग एक नई परेशानी से जूझ रहा है। तेंदुओं का मूवमेंट न होने पर वन विभाग की टीमें चार-छह दिन इंतजार के बाद पिंजरे की लोकेशन बदलना चाहती हैं, परंतु ग्रामीण उन्हें रोक रहे।

उन्हें लगता है कि यदि पिंजरा हट गया तो तेंदुआ पकड़ा नहीं जाएगा। जबकि वन विभाग तर्क दे रहा कि सटीक लोकेशन नहीं होने के कारण तेंदुआ अब तक नहीं फंसा, इसलिए लोकेशन बदलनी होगी। इसको लेकर भी वनकर्मियों व ग्रामीणों के बीच तनातनी हो जाती है।

 

रेस्क्यू करके पकड़े गए तेंदुओं को छोड़ने से पहले उनके स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसमें पंजे, दांत व शरीर स्वस्थ होने पर तेंदुओं को जंगल के अंदर छोड़ दिया गया। जुलाई से 15 सितंबर तक 42 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है, जिनको जंगल और चिड़ियाघरों में छोड़ा जा रहा है।

- पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक


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