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जेएनएन, पीलीभीत: पॉलीथिन पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी शहर के नालों, प्रमुख चौराहों और दुकानों पर पॉलीथिन मिल रही है। नालों में पॉलीथिन पहुंचने से पानी का निकास प्रभावित हो रहा है। पालिका अधिकारियों का अभियान भी कागजों में ही सिमट कर रह जाता है।

पर्यावरण को नुकसान पहुंचान और जलनिकासी का रास्ता अवरुद्ध होने के कारण बनने की वजह से सरकार ने पॉलीथिन का प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। जिसे पूरे प्रदेश में लागू भी कर दिया गया है। प्रशासन का दावा है, कि शहर में पॉलीथिन प्रतिबंध पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, लेकिन इस सबके बावजूद भी शहर के नाले नालियों, प्रमुख चौराहे और दुकानों पर पॉलीथिन आसानी से देखने को मिल रही है। जिससे शहर नाले और नालियां भी चोक हो रही है। अब प्रतिबंध होने के बावजूद भी शहर में पॉलीथिन कहां से आ रही है। इन सब से पालिका प्रशासन भी अंजान है। ढाई लाख आवादी वाले अपने शहर में पिछले एक दशक से पॉलीथिन का प्रयोग इतनी तेजी से बढ़ रहा है, कि लोग घरों से निकलने से पहले थैला आदि का प्रयोग ही भूल गए है। दुकानों पर सहज से उपलब्ध होने वाली प्लास्टिक के कैरी बैग में ही सामान लेकर घरों में लौटते है। नतीजा यह हुआ कि शहर समेत नगर कस्बों समेत छोटे बड़े बाजारों में प्लास्टिक के कैरी बैग बड़ी तादाद में फेंके हुए देखे जाते है। यहीं पॉलीथिन नालियों में जाकर शहर की जल निकासी व्यवस्था में अवरोध बन रही है।

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कार्रवाई सिर्फ कागजों में ही

नगर पालिका परिषद के द्वारा शहर में समय समय पर अभियान चलाकर दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों से पॉलीथिन को जब्त भी किया जाता है, लेकिन कार्रवाई में सिर्फ खानापूíत की जाती है और कागजों में कार्रवाई को पूरा दिखा दिया जाता है। यही वजह है कि शहर में पॉलीथिन पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं हो पा रही है और दुकानों पर आसानी से पॉलीथिन मिल जाती है।

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वर्जन:

पॉलीथिन को प्रतिबंधित करने के लिए समय समय पर अभियान चलाया जाता है। जिससे लोग पॉलीथिन का प्रयोग कम करें। वहीं कर्मचारियों के द्वारा दुकानदारों के पास से बरामद पॉलीथिन को पकड़कर पालिका एक्ट के तहत जुर्माना भी वसूला जाता है। निशा मिश्रा अधिशासी अधिकारी नगर पालिका

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Posted By: Jagran

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