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फॉर्म-8 के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा! बिना किसी रिकॉर्ड के बदल दिए 10 हजार से ज्यादा वोटर, जांच में सनसनीखेज खुलासा

Published: Fri, 23 Oct 2026 01:30 PM (IST)

पीलीभीत में फॉर्म-8 के जरिए 10,470 मतदाताओं के रिकॉर्ड बिना किसी दस्तावेज के बदल दिए गए, जिसकी जांच में बड़ा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ईआरओ के लागिन से फार्म-8 के नाम पर किया गया फर्जीवाड़ा

पीयूष दुबे, पीलीभीत। फैजान अली खान पुत्र मुशफिक अली खान के एपिक नंबर सीएमएल 2099718 की आनलाइन जांच करने पर मतदाता का नाम रईस अली पुत्र हुजैब अली मिला। ऐसे ही एपिक नंबर एसजेडके 0064064 में मतदाता का नाम आशिक अली पुत्र महमूद अली था, जबकि उसके स्थान पर खलील खां पुत्र जलाल खां दर्ज पाया गया।

यह तथ्य केवल सपा या कांग्रेसजन के आरोपों का नहीं है, बल्कि मतदाता सूची में फर्जीवाड़े की जांच में उप जिला निर्वाचन अधिकारी एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रसून द्विवेदी की जांच में सामने आए।

इस मामले में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) पीलीभीत विधानसभा रहे एसडीएम अमरिया हेमंत कुमार चौधरी, पूर्व ईआरओ एसडीएम पूरनपुर मयंक गोस्वामी और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर के कंप्यूटर आपरेटर अनिल कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी पंजीकृत कराई गई।

Election Forms and Voter List Infographic

मतदाता निर्वाचन के दौरान जब एसआइआर किया तब तक सब सही था। असली खेल इसके बाद शुरू हुआ। यह एडीएम वित्त एवं राजस्व की प्रारंभिक जांच में सामने आया।

एडीएम वित्त एवं राजस्व की 22 अक्टूबर को मिली जांच के अनुसार वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर से दिनांक 31 मई से 29 अगस्त तक 13,779 फार्मों की प्रविष्टि की गई थी।

इसमें तात्कालीन ईआरओ मयंक गोस्वामी के कार्यकाल 4,717 फार्मों की प्रविष्टि हुई। वहीं, ईआरओ हेमंत कुमार चौधरी के कार्यकाल में 17 जुलाई के बाद 9,062 फार्मों की प्रविष्टि की गई। दोनों को मिलाकर 13,779 फार्मों की प्रविष्टि की गई, जिसमें से 10,470 फार्मों को स्वीकृत और 3,309 फार्मों को अस्वीकृत किया गया।

हैरानी की बात यह सामने आई कि वीआरसी कार्यालय की ओर से किसी भी आफलाइन फार्म और आनलाइन फार्म का रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं था। इनको बिना रिकार्ड के ही ईआरओ के लागिन से सीधे फार्मों को स्वीकृत कर दिया, जो चुनाव आयोग का सीधा उल्लंघन है।

ऐसा करने पर सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप के शिकायती पत्र के आधार पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा-32 निर्वाचक नामावलियों की तैयारी आदि से संबद्ध पदीय कर्तव्यों का भंग और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी पंजीकृत की गई।

इस नियम को तोड़कर किया फर्जीवाड़ा

फार्म-8 स्वीकृत करने में वीआरसी कार्यालय के दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया। इससे मैनुअल आन इलेक्टोरल रोल, मार्च 2023 के अध्याय-11 के पैरा 11.4.6 का प्रत्यक्ष उल्लंघन हुआ।

जिसमें असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन आफिसर द्वारा निपटाए गए मामलों में से कम से कम 10 प्रतिशत फार्मों की अनिवार्य जांच की जानी चाहिए। आवश्यकतानुसार फील्ड वेरिफिकेशन करने का स्पष्ट निर्देश है।

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