आदमखोर बाघिन की चतुराई से परेशान विशेषज्ञ! 15 दिन से सिर्फ पगमार्क, हाथियों की गश्त भी नाकाम
पीलीभीत में शांतिनगर गांव में वृद्ध का शिकार करने वाली आदमखोर बाघिन को पकड़ने में वन्यजीव विशेषज्ञ और वन विभाग ...और पढ़ें

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HighLights
28 अगस्त को शांतिनगर में वृद्ध का किया था शिकार
टीम को 17 सितंबर से केवल बाघ के नजर आए पगमार्ग
पीयूष दुबे, पीलीभीत। अगस्त के अंतिम सप्ताह के शांतिनगर गांव में वृद्ध को खाने वाली बाघिन की चतुराई के आगे वन्यजीव विशेषज्ञों को पसीना आ रहा। 18 सितंबर को उसे ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मिल चुकी। वन्यजीव चिकित्सक और वन रेंजर टीम लेकर पूरे दिन बाघिन की लोकेशन तलाशते हैं, मगर सफलता नहीं मिल रही।
वे जिस संभावित क्षेत्र में रेस्क्यू के लिए घूमते हैं, अगली सुबह उसी के आसपास खेतों में पगमार्ग मिल जाते हैं। इससे साबित हो रहा कि बाघ का मूवमेंट उसी क्षेत्र में है, लेकिन टीम की आहट से छिप जाती है।
उसके लिए पूर्व में लगाए गए पिंजरे खाली पड़े रहे थे। ग्रामीणों को चिंता है कि यदि बाघिन समय रहते नहीं पकड़ी गई तो धान की कटाई में खतरा रहेगा। पूरनपुर के हजारा क्षेत्र के गांव शांतिनगर में 28 अगस्त को खेत में गए वृद्ध किसान मुंशी प्रसाद को बाघ ने अपना शिकार बना लिया था।

इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर करीब 16 घंटे तक जाम लगाया था और वन विभाग के खिलाफ कड़ा प्रदर्शन किया था। बाघ के उस क्षेत्र में मूवमेंट को देखते हुए पहले तो वहां पर पिंजरा लगाया गया था।
साथ ही मचान बनाकर बाघिन के मूवमेंट को समझने की कोशिश की। वृद्ध का शिकार करने के बाद 17 सितंबर को सूचना मिली थी, जब वन कर्मियों की टीम पहुंची तो वहां बाघिन नहीं मिली।
इसके बाद 18 सितंबर को बाघ ने बैल का शिकार कर दिया। इसके बाद भी वन कर्मियों की टीम ट्रेस करती रही, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। 19 सितंबर के बाद बाघ दिखाई नहीं, लेकिन 20, 21 और 22 सितंबर को गन्ने के खेतों में पगमार्क मिले।
इसके बाद दो हाथियों को भी दुधवा टाइगर रिजर्व से मंगवाया गया। हाथियों के साथ गश्त करने के बाद भी बाघ पकड़ में नहीं आया। दुधवा टाइगर रिजर्व से दो वन्यजीव पशु चिकित्सक, वन रेंजर समेत पांच सदस्यीय टीम लगातार उसके मूवमेंट को देखने का प्रयास कर रही है।
मगर, हाथ में पगमार्ग के अलावा कुछ नहीं आया। पिछले सप्ताह वर्षा होने के बाद से पगमार्ग भी खोजना मुश्किल हो गया है। वहीं, 18 सितंबर को 15 दिन में ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति मिली, लेकिन तय अवधि गुजरने के बावजूद बाघ पकड़ा नहीं जा सका।
इससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। वन रेंजर संपूर्णानगर ललित कुमार ने कहा कि ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति के लिए पत्र भेजा जाएगा।
बीते वर्ष आठ दिन चला था आपरेशन त्रिनेत्र
बीते वर्ष जुलाई महीने में एक बाघिन ने 14 मई से 17 जुलाई के अंतराल में पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। 17 जुलाई को इस बाघिन ने बिथरा मंडरिया गांव में गन्ने के खेत में काम कर रही 50 वर्षीय तृष्णा पर हमला कर उनकी जान ले ली थी।
लगातार हो रही मौतों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश देखते हुए विभाग ने 17 जुलाई से ही इस बाघिन को रेस्क्यू करने के प्रयास शुरु कर दिए थे। लेकिन यह लगातार ठिकाना बदलती रही।
इस ऑपरेशन में तीन ड्रोन, दो हाथी, करीब 120 वनकर्मियों व बाघ मित्रों की टीम समेत पूरा प्रशासनिक अमला जुटा रहा। रुहेलखंड परिक्षेत्र के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह भी मौके पर जुटे रहे। आठ दिनों तक दिन रात प्रयास के बाद डंडिया गांव स्थित गन्ने के खेतों से रेस्क्यू किया गया था। इसे आपरेशन त्रिनेत्र नाम दिया गया था।
