बाघ ही नहीं, अब Pilibhit Tiger Reserve में दिखेगी दुनिया की सबसे छोटी बिल्ली, वजन जानकर रह जाएंगे हैरान
पीलीभीत टाइगर रिजर्व अब बाघों के साथ दुनिया की सबसे छोटी बिल्ली, रस्टी स्पाटेड कैट के लिए भी पहचान बना ...और पढ़ें

पीटीआर के पर्यटन क्षेत्र में विचरण करती रस्टी स्पाटेड कैट। स्त्रोत: इंटरनेट मीडिया
HighLights
पीटीआर में रस्टी स्पाटेड कैट का म्यूटेशन भी हो चुका है दर्ज
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीटीआर अब केवल बाघ, तेंदुए और भालू जैसी बड़ी प्रजातियों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ और सूक्ष्म वन्यजीवों के लिए भी दुनियाभर में पहचान बना रहा है। पीटीआर के घने जंगलों में आने वाले पर्यटक अब बाघ के साथ-साथ दुनिया की सबसे छोटी बिल्ली की प्रजाति रस्टी स्पाटेड कैट के भी दीदार कर सकते हैं। बीते पर्यटन सत्र में इस अत्यंत दुर्लभ प्रजाति को कई बार देखा गया, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधिकारियों में काफी उत्साह है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, पूरी दुनिया में बिल्ली परिवार की लगभग 41 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें बाघ, शेर और तेंदुए जैसी बड़ी प्रजातियों के बारे में तो अधिकांश लोग जानते हैं।
मगर इसी परिवार में कई ऐसी छोटी प्रजातियां भी शामिल हैं जो आसानी से नजर नहीं आतीं। इन्हीं दुर्लभ प्रजातियों में शुमार रस्टी स्पाटेड कैट को दुनिया की सबसे छोटी बिल्ली प्रजाति माना जाता है।
शारीरिक बनावट की बात करें तो इस बिल्ली की लंबाई महज 13 से 18 इंच तक ही होती है, जबकि इसका वजन मात्र 900 ग्राम से लेकर अधिकतम डेढ़ किलोग्राम तक होता है।
आकार में बेहद छोटी होने के कारण घने जंगल में इसे देख पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। यह प्रजाति मुख्य रूप से निशाचर है और आमतौर पर रात के अंधेरे में ही शिकार या विचरण के लिए बाहर निकलती है।
अपने बेहद शर्मीले स्वभाव के कारण यह इंसानी आहट पाते ही छिप जाती है। हालांकि, पीटीआर का शांत और अनुकूल माहौल इसके लिए इतना मुफीद है कि पिछले पर्यटन सत्र में इसे कई बार देखा गया। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इसका म्यूटेशन (त्वचा का रंग बदलना) भी दर्ज किया जा चुका है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद अहम बात है।
पीटीआर में इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी यह साबित करती है कि यह जंगल न केवल बाघों के लिए, बल्कि अति संवेदनशील और विलुप्तप्राय छोटे वन्यजीवों के लिए भी एक बेहतरीन और सुरक्षित प्राकृतिक आवास बन चुका है।
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी यहां की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। बाघों के साथ सभी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इन दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा और इनके अनुकूल प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।
