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PTR में खत्म हुई ग्रीष्मकालीन पक्षियों की चौपाल, अब साइबेरिया से आने वाले रंग-बिरंगे परिंदों का इंतजार

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:13 PM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षी अपने वतन लौट चुके हैं, और अब वन विभाग तथा पक्षी प्रेमी साइबेरिया ...और पढ़ें

ग्रीष्मकालीन पक्षी जैकोबिन कुक्कू और शीतकालीन प्रवासी पक्षी कामन सैंडपाइपर स्रोत इंटरनेट मीडिया

ग्रीष्मकालीन पक्षी जैकोबिन कुक्कू और शीतकालीन प्रवासी पक्षी कामन सैंडपाइपर स्रोत इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. शारदा सागर डैम और आसपास के वेटलैंड्स में 360 से अधिक प्रजातियों का बसेरा

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। शानदार जैव विविधता और बाघों की दहाड़ के लिए मशहूर पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) पक्षियों का भी पसंदीदा आशियाना बन चुका है। ज्वैल आफ तराई के नाम से विख्यात जंगल से अब ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षियों की चौपाल खत्म हो गई है। गर्मी का मौसम बिताने आए ये मेहमान अब अपने वतन लौट चुके हैं।

वन विभाग और पक्षी प्रेमियों की निगाहें अब सात समंदर पार से आने वाले उन शरदकालीन पक्षियों पर टिक गई हैं, जो हर साल सर्दियों में यहां डेरा डालते हैं। पीटीआर भले ही बाघों की साइटिंग के लिए इंटरनेट मीडिया ट्रेंड्स में रहता है।

तराई का यह खूबसूरत जंगल महज बाघों तक ही सीमित नहीं है। टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर मियां बताते हैं कि पीटीआर व इसके आसपास के वेटलैंड्स में पक्षियों की 360 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।

इनमें से लगभग 100 से अधिक प्रजातियां ऐसी हैं, जो साल में दो बार यहां प्रवास के लिए आती हैं। बीते मार्च-अप्रैल में मानसून से पहले और बाद में तराई के इन जंगलों में जैकोबिन कुक्कू, इंडियन पिट्टा, गोल्डन ओरियोल और लिटिल टर्न जैसे ग्रीष्मकालीन पक्षियों ने दस्तक दी थी।

चार से पांच महीने का प्रवास पूरा करने के बाद लगभग सभी पक्षी लौट चुके हैं। मौसम के मिजाज में हो रहे बदलाव के साथ अब शरदकालीन मेहमानों की आमद शुरू होने वाली है।

इसी महीने के अंत या नवंबर के पहले सप्ताह से साइबेरिया, रूस और सेंट्रल एशिया से पक्षियों के बड़े-बड़े झुंड यहां पहुंचना शुरू हो जाएंगे। ग्रीष्मकालीन पक्षियों के मुकाबले सर्दियों वाले मेहमानों की संख्या कहीं ज्यादा होती है।

इस बार भी शारदा सागर डैम और स्थानीय वेटलैंड्स में कामन सैंडपाइपर, कामन पोचार्ड, मालार्ड, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड और नार्दन पिनटेल जैसे रंग-बिरंगे परिंदे चहचहाते नजर आएंगे।

ये मेहमान करीब पांच महीने बिताने के बाद फरवरी के अंत में वापसी करते हैं। पीटीआर डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि वन और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों के बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं।

संरक्षण के चलते ही जंगल में वन्यजीवों के साथ-साथ पक्षियों की प्रजातियों में भी इजाफा हुआ है। सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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