PTR Staff Crunch: पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 50% से ज्यादा पद खाली, 100 कर्मचारियों के भरोसे बाघों की सुरक्षा
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कुल 224 स्वीकृत पदों में से 124 पद खाली हैं, जिससे बाघों और वन्यजीवों की सुरक्षा ...और पढ़ें

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HighLights
कुल 224 स्वीकृत पदों में से 124 पद खाली
वनरक्षक के 47 पद खाली होने से गश्त प्रभावित
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीटीआर में बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था विभाग के लिए चुनौती बनती जा रही है। जंगल की रखवाली, गश्त और प्रबंधन का जिम्मा जिन कंधों पर है, लंबे समय से उनकी कमी बनी हुई है। वर्तमान स्थिति यह है कि पीटीआर में कुल 224 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 124 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।
बाघों की लगातार बढ़ती आबादी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियों के बीच पूरी व्यवस्था महज 100 कर्मचारियों के सहारे चलाई जा रही है। स्थानीय अधिकारियों की ओर से समय-समय पर शासन को स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जंगल की सुरक्षा, अवैध कटान रोकने और गश्त में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फील्ड स्टाफ की होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों का भारी अभाव है। आंकड़ों पर गौर करें तो वन रक्षक के 64 स्वीकृत पदों में से 47 पद खाली पड़े हैं।
इतने बड़े वन क्षेत्र की गश्त और निगरानी के लिए केवल 17 वनरक्षक ही तैनात हैं। वनरक्षक ही जंगल की असली आंख और कान होते हैं, ऐसे में इनकी कमी से सुरक्षा व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। इसी तरह, वन दरोगा के 56 पदों में से 21 पद रिक्त हैं।
रेंजर के नौ में से तीन और डिप्टी रेंजर के आठ में से तीन पद खाली पड़े हैं। गश्त और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी आपात स्थितियों से त्वरित निपटने के लिए वाहनों की तुरंत आवश्यकता होती है, लेकिन पीटीआर में चालकों का भी अता-पता नहीं है।
15 स्वीकृत पदों में से 12 पद खाली हैं। ऐसे में सिर्फ तीन चालकों के सहारे काम चलाया जा रहा है। वहीं, 22 ट्रैक्टर क्लीनर में से 13 पद रिक्त हैं। जंगल में गश्त के लिए हाथियों की अहम भूमिका होती है, लेकिन महावत और चारा काटने वालों के दोनों पद शून्य पड़े हैं।
इसके अलावा अर्दली के नौ में से तीन, चौकीदार के सात में से दो और सफाईकर्मी का इकलौता स्वीकृत पद भी खाली है। कार्यालय स्तर पर भी प्रशासनिक अधिकारी के दो, स्टेनो व सर्वेयर का एक-एक पद रिक्त है। 50 प्रतिशत से भी कम फील्ड स्टाफ के साथ पीटीआर प्रशासन कैसे सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, यह एक बड़ा सवाल है।
तबादले ने और बढ़ाया संकट
पीटीआर में कर्मचारियों का संकट जून माह में तब और गहरा गया, जब राज्य वन प्रशासन ने विभिन्न रैंक के 14 वनकर्मियों का यहां से अन्यत्र तबादला कर दिया। हालांकि, कर्मचारियों की कमी को देखते हुए मुख्य वन संरक्षक ने इन कर्मियों को कार्यमुक्त करने से साफ इनकार कर दिया है।
वन एवं वन्यजीवों के हित को देखते हुए, राज्य स्तर से स्थानांतरित किए गए 14 वनकर्मियों को उनके वर्तमान पदों से कार्यमुक्त किया जाना संभव नहीं है। रिजर्व पहले से ही कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहा है।
- पीपी सिंह, एफडी, पीटीआर
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