Pilibhit Tiger Reserve: 1 नवंबर से शुरू हो रहा नया पर्यटन सत्र, सफारी रूट से लेकर जंगल तक बदले नजारे
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 1 नवंबर से शुरू हो रहे पर्यटन सत्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। वन विभाग ...और पढ़ें

पीटीआर के वनक्षेत्र में किया गया ग्रासलैंड प्रबंधन। स्रोत: विभाग
HighLights
तृणभोजी वन्यजीवों के भोजन को सुरक्षित रखते हुए किया जा रहा ग्रासलैंड प्रबंधन
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। बाघों के गढ़ और तराई की शान के रूप में विख्यात पीटीआर में आगामी पर्यटन सत्र को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मानसून की विदाई और जंगल से जलजमाव खत्म होने के बाद वन विभाग ने पीटीआर को पर्यटकों के लिए अनुकूल बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
पीटीआर प्रशासन का सबसे अधिक जोर जंगल के घास के मैदानों के प्रबंधन पर है। पर्यटन सत्र से पहले इस कार्य को पूरा कर अन्य आवश्यक कार्यों को किया जाना है। पीटीआर प्रशासन एक नवंबर से सत्र शुरु करने को लेकर युद्धस्तर पर तैयारियां कर रहा है।

बारिश के दौरान जंगल में घास काफी ऊंची हो जाती है, जिससे न सिर्फ वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण में रुकावट आती है, बल्कि सफारी के दौरान सैलानियों को उनके दीदार में भी बाधा उत्पन्न होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने वन्यजीवों के बेहतर पर्यावास को सुनिश्चित करने के लिए पर्यटन स्थलों सहित जंगल के विभिन्न हिस्सों में ग्रासलैंड संवारने का कार्य पर शुरू करा दिया है, जिससे प्रकृति प्रेमियों को सफारी का बेहतरीन अनुभव मिल सके।
ग्रासलैंड प्रबंधन पीटीआर के प्राकृतिक संतुलन का एक बेहद अहम हिस्सा है। प्रथम चरण में पर्यटन वाले स्थानों और सफारी रूट के आसपास के घास के मैदानों का प्रबंधन किया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में वन विभाग इस बात का विशेष ध्यान रख रहा है कि जंगल के शाकाहारी और तृणभोजी वन्यजीवों, जैसे- हिरण, पाढ़ा, चीतल और सांभर के प्राकृतिक भोजन को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
उनके लिए जंगल में पर्याप्त चारा सुरक्षित करते हुए घास की कटाई कराई जा रही है। ग्रासलैंड प्रबंधन के इसी महत्वपूर्ण कार्य के साथ-साथ पर्यटकों के लिए जंगल के कच्चे सफारी मार्ग भी दुरुस्त हो रहे हैं।
रास्तों और उनके दोनों छोर पर उग आई घनी घास की सफाई होने से सैलानियों को आवागमन में कोई असुविधा नहीं होगी और वे आसानी से वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे।
बारिश के बाद जंगल में उगी ऊंची घास की कटाई कर ग्रासलैंड प्रबंधन का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि शाकाहारी और तृणभोजी वन्यजीवों के लिए पर्याप्त चारा सुरक्षित रहे। इसके साथ ही कच्चे सफारी मार्गों को भी दुरुस्त किया जा रहा है, जिससे सैलानियों को सफारी का बेहतर अनुभव मिल सके।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
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