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World Tourism Day: संरक्षण और पर्यटन का वैश्विक मॉडल बना पीलीभीत टाइगर रिजर्व, बाघों की दहाड़ से गूंज रही तराई

Published: Sun, 27 Sep 2026 03:29 PM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) विश्व पर्यटन दिवस पर संरक्षण और पर्यटन का वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है, जहां बाघों की आबादी दोगुनी होकर 79 तक पहुंच गई है।

पीटीआर में विचरण करते बाघ

पीटीआर में विचरण करते बाघ

HighLights

  1. पीलीभीत टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण का वैश्विक मॉडल बना।

  2. बाघों की संख्या दोगुनी होकर 79 तक पहुंची, TX2 अवॉर्ड जीता।

  3. आधुनिक तकनीक और 'बाघ मित्र' कार्यक्रम ने सफलता दिलाई।

सृजित अवस्थी, पीलीभीत। साल के घने जंगल, शारदा नदी का बहता पानी और बीच-बीच में गूंजने वाली बाघों की दहाड़... तराई का यही रोमांच अब पूरी दुनिया को लुभा रहा है। एक दौर था जब यह जंगल अपनी पहचान और अस्तित्व के संकट से जूझ रहा था, लेकिन आज तराई का यही कोना पूरी दुनिया को संरक्षण का नया पाठ पढ़ा रहा है।

विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर जब पूरी दुनिया जिम्मेदार पर्यटन के नए मॉडल तलाश रही है, तब पीटीआर बेमिसाल नजीर बनकर उभरा है। बाघों की आबादी तय समय से पहले दोगुनी कर वैश्विक टी-एक्स टू अवॉर्ड जीतने वाला यह जंगल अब महज एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन की अंतरराष्ट्रीय पाठशाला बन चुका है। आए दिन देश विदेश के लोग इस मॉडल को करीब से देखने पहुंच रहे हैं।

तराई के इस 730 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के समय यहां केवल 25 बाघ थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 79 तक पहुंच गई है। बीते पर्यटन सत्र में 20 से 22 नए शावक भी देखे गए हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां बाघों की कुल संख्या 90 के पार पहुंच जाएगी।

बाघों की यह बढ़ती आबादी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पीटीआर में प्राकृतिक संतुलन और खाद्य शृंखला पूरी तरह से समृद्ध है। पीटीआर में संरक्षण और पर्यटन को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। अब जंगल की निगरानी केवल वनकर्मियों की गश्त के भरोसे नहीं है, बल्कि एआई और आधुनिक तकनीक यहां तीसरी आंख की भूमिका निभा रही है।

थर्मल ड्रोन, एम-स्ट्राइप्स एप आधारित स्मार्ट गश्त और ई-सर्विलांस कैमरों का उपयोग कर बाघों की सटीक लोकेशन और संभावित खतरों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

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पर्यटकों की सुरक्षित सफारी और मानव-वन्यजीव संघर्ष टालने को संवेदनशील क्षेत्रों में चेन-लिंक फेंसिंग व अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत किया गया है। इसके अतिरिक्त यहां बाघ एक्सप्रेस नामक जागरुकता कार्यक्रम भी बीते दो वर्षों से चलाया जा रहा है।

विविधता से टूटे पर्यटकों के रिकॉर्ड

नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी और उत्तराखंड की सीमाओं से सटे होने के कारण पीटीआर की जैव-विविधता बेहद अनूठी है। यहां पर्यटकों की आमद हर साल रिकार्ड तोड़ रही है। वर्ष 2021-2022 में जहां केवल 18,745 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं बीते पर्यटन सत्र में यह आंकड़ा 56,783 तक पहुंच गया। इससे पीटीआर को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। आगामी सत्रों में इस आंकड़े के और भी अधिक बढ़ने का अनुमान है।

खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सराहा बाघमित्र मॉडल

पीटीआर के इस वैश्विक माडल की सबसे बड़ी ताकत इसकी जन-भागीदारी है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से वर्ष 2019 में शुरू किया गया बाघ मित्र कार्यक्रम संरक्षण का मजबूत स्तंभ बन गया है। जिले में 140 बाघ मित्र स्वयंसेवक के रूप में काम कर रहे हैं, जो ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही वन्यजीवों की निगरानी करते हैं।

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इस अनूठे मॉडल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी तारीफ कर चुके हैं। इसी समर्पण के चलते वन्यजीव संरक्षण व रेस्क्यू अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले बाघमित्र अतुल सिंह को भारत सरकार ने वर्ष 2025 की गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। तकनीक और जन-भागीदारी का यही गठजोड़ पीटीआर को दुनिया में सबसे अलग और खास बनाता है।

आधुनिक तकनीक के उपयोग और बाघ मित्र कार्यक्रम के तहत स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से ही बाघों की आबादी में यह वृद्धि संभव हो सकी है। विभाग वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास सुनिश्चित करने के साथ पर्यटकों को सुरक्षित सैर का अनुभव देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

                                                                      मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर