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रामलीला चंदे के विवाद में दो भाइयों की हत्या, खूनी संघर्ष के बाद बिलखती माँ बोली- 'खून का बदला खून चाहिए'

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:11 PM (IST)

पीलीभीत के अमरिया में रामलीला चंदे के विवाद में अंकित और मोहित गुप्ता की हत्या कर दी गई। मां नन्ही ...और पढ़ें

गुमसुम बैठी मृतक अंकित और मोहित की मां नन्ही देवी। जागरण

गुमसुम बैठी मृतक अंकित और मोहित की मां नन्ही देवी। जागरण

HighLights

  1. अमरिया में रामलीला कमेटी के चंदे के विवाद में गई अंकित और मोहित की जान, गिरफ्तारी से नहीं मिला मां को सुकून

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। दो बेटों की एक साथ मौत ने मां नन्ही देवी को झकझोर दिया। अमरिया में रामलीला कमेटी के चंदे को लेकर हुए खूनी संघर्ष में अंकित गुप्ता और मोहित गुप्ता की जान जाने के बाद परिवार में चीख-पुकार मची है। मां नन्ही देवी का दर्द उस समय आक्रोश में बदल गया, जब उन्होंने आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सुनी।

कहा कि केवल गिरफ्तारी से सुकून नहीं मिलेगा। उनके बेटों की जान लेने वालों को भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए। कहा कि उन्हें खून का बदला खून चाहिए।

अंकित और मोहित दोनों शादीशुदा थे। अंकित की शादी तीन साल पहले खुशबू से हुई थी, जबकि मोहित की शादी करीब 10 साल पहले नेहा से हुई थी। दोनों भाइयों की कोई संतान नहीं थी।

परिवार में उनके बड़े भाई रोहित, उनकी पत्नी शिवानी और एक साल का बेटा रेयांश हैं। दो बेटों को खोने के बाद मां के साथ परिवार के दूसरे सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।

घर आने वाले लोग स्वजन को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन मां को बेटों के खोने का गम बार-बार विचलित कर रहा है। रामलीला कमेटी के चंदे के हिसाब को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार रात खूनी संघर्ष में बदल गया था।

फायरिंग में अंकित और मोहित के अलावा राहगीर कुणाल श्रीवास्तव की भी मौत हो गई, जबकि रोज गुप्ता गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित समेत आठ लोग को हिरासत में लिया है। तीन मौतों से अमरिया कस्बे में शोक का माहौल है।

हार्डवेयर और कारोबार संभालते थे दोनों भाई

अमरिया कस्बे में जान गंवाने वाले अंकित और मोहित गुप्ता कारोबार से जुड़े थे। अंकित हार्डवेयर का काम करते थे, मोहित भी कारोबारी थे। परिवार के एक अन्य सदस्य सूरज गुप्ता सरिया-सीमेंट का कारोबार करते हैं।

वहीं, घटना में मारे गए कुणाल श्रीवास्तव कस्बे के एक बुक डिपो में काम करते थे। एक तरफ दो सगे भाइयों की मौत से परिवार उजड़ गया, तो दूसरी तरफ रोजमर्रा की कमाई के सहारे जीवन चलाने वाले कुणाल के परिवार ने भी अपना सदस्य खो दिया।

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