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रोज 10 हजार का खर्च और 2 हथनियां तैनात, फिर भी हाथ नहीं आया हजारा का बाघ; 4 लाख पानी में

Published: Tue, 27 Oct 2026 04:23 PM (IST)

पीलीभीत के हजारा क्षेत्र में बाघ को पकड़ने का अभियान पौने दो माह बाद भी विफल रहा है। इस पर ...और पढ़ें

हजारा में बाघ पकड़ने को मौजूद हाथी। स्रोत विभाग

हजारा में बाघ पकड़ने को मौजूद हाथी। स्रोत विभाग

HighLights

  1. संसाधन जुटाने के बाद भी विभाग के हाथ खाली, उठ रहे सवाल

उमेश शर्मा, पूरनपुर (पीलीभीत)। हजारा क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघ को रेस्क्यू करने के लिए पौने दो माह से चल रहे अभियान में चार लाख रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी विभाग खाली हाथ है। हथनियों की डाइट और अन्य संसाधनों पर खर्च बढ़ता जा रहा है। इससे विभाग की कार्यशैली, रणनीति और संसाधनों के इस्तेमाल पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

दो वर्ष से आबादी और खेतों में स्वच्छंद विचरण करने वाले बाघ ने सितंबर में शांतिनगर के एक वृद्ध को हमला कर मार डाला था। बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए 12 सितंबर को 15 दिन की अनुमति मिली थी।

शांतिनगर के पास बाघ की लोकेशन मिलने पर मचान बनाया गया। एक्सपर्ट प्रयास में रहे लेकिन बाघ गच्चा देकर निकल गया। बाघ की गन्ने खेत और अन्य स्थानों पर लोकेशन मिलना शुरू हुई।

दुधवा टाइगर रिजर्व से प्रशिक्षित हथिनी चमेली और सुलोचना को 24 सितंबर को रेस्क्यू अभियान में लगाया। फिर भी बाघ ट्रेंक्युलाइज नहीं हो सका। 26 सितंबर को अनुमति की वैधता समाप्त हो गई।

कई दिन बाद बाघ ने कबीरगंज के अखंड फार्म के पास एक बेसहारा पशु को हमला कर मार डाला। टीम ने मौका तलाशा, लेकिन अनुमति न मिलने से वहां से बाघ निकल गया।

नौ अक्टूबर को वन विभाग को दोबारा अनुमति मिली, लेकिन बाघ की लोकेशन नहीं मिली। 12 अक्टूबर को मिर्चिया में उसे घेरकर ट्रेंक्युलाइज करने के प्रयास हुए, लेकिन वह फिर निकल गया।

टीम कई को दिनों तक सिर्फ पदचिह्न मिलते रहे। बाघ कहीं नहीं दिखा। 23 अक्टूबर की दोबारा मिली अनुमति की वैधता भी समाप्त हो गई। अब फिर से अनुमति का प्रयास करना बताया जा रहा है।

10 हजार के करीब रोजाना डाइट पर हो रहा खर्च

पौने दो माह से बाघ को रेस्क्यू करने को चलाए जा रहे अभियान में एक माह से अधिक समय हथनियों को भी हजारा क्षेत्र में हो गया है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि एक हथनी की डाइट प्रतिदिन पांच हजार रुपये की पड़ रही है।

दो हथनी का खर्च 10 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। अभियान में दो हथनी, पिंजरा में बांधने के लिए पड्डा, बकरी अन्य संसाधन जुटाने में एक माह में करीब चार लाख रुपये खर्च हो जाता है। एक हाथी की देखभाल के लिए दो व्यक्तियों को लगाया जाता है जो एक्सपर्ट होते हैं।

हथनियों को ये दी जाती है डाइट

  • एक हाथी को प्रतिदिन दो क्विंटल हरा चारा।
  • सोयाबीन, चावल, गुड़, चना, दलिया, हरे पत्ता आदि।

 

रेस्क्यू अभियान में लगे एक हाथी का प्रतिदिन खर्च लगभग तीन हजार रुपये से अधिक आ रहा है। महावत और अन्य संसाधनों पर भी खर्च होता है। इसका खर्च वन विभाग वहन करता है। अनुमति समाप्त हो गई है। तीसरी बार अनुमति के लिए आवदेन किया है।

ललित कुमार, क्षेत्रीय वनाधिकारी, सामाजिक वानिकी प्रभाग संपूर्णानगर


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