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कहीं आप भी तो नहीं पी रहे जहर? हाईस्कूल पास युवक घर में बना रहा था नकली कफ सिरप, ऐसे हुआ खुलासा

Published: Tue, 20 Jan 2026 11:07 PM (IST)

पीलीभीत में एक हाईस्कूल पास युवक को घर पर नकली कफ सिरप बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

HighLights

  1. आरोपित के पास 375 कफ सिरप की नकली शीशियां, बनाने के उपकरण बरामद

  2. यूट्यूब को देखकर बनाने लगा था नकली कफ सिरप, मेडिकल स्टोरों और नशेड़ियों को करता था सप्लाई

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। हाईस्कूल पास एक युवक ने अस्पताल में कंपाउंडर का काम सीखा। इसके बाद झोलाछाप बनकर लोगों को दवाइयां देना शुरू कर दिया। दवा में कमाई देखकर उसने यू-ट्यूब देखकर घर में नकली कफ सिरप बनाना शुरू कर दिया। इन कफ सिरप को नशेड़ियों और कुछ मेडिकल स्टोरों पर बिक्री करना शुरू कर दिया।

घर के अंदर बनाए जाने वाले इन नकली कफ से लोगों की जान भी जा सकती थी। घुंघचाई थाना पुलिस ने नकली कफ सिरप बनाने के आरोपित युवक को पकड़ लिया। अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस करके नकली कफ सिरप बनाने की फैक्ट्री का राजफाश किया।

पूरनपुर से घुंघचाई क्षेत्र में एक युवक के नकली कफ सिरप बिक्री करने की सूचना पुलिस को मिली तो घुंघचाई पुलिस ने छापामारी करके पूरनपुर थाना क्षेत्र के गांव लाह निवासी सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित सुरेश के पास पुलिस को टोपेक्स गोल्ड की 340 शीशी और कोयोरक्स-टी 35 शीशी समेत 375 कफ सिरप की शीशियां मिलीं।

इसक साथ ही कफ सिरप बनाने का सामान मिला, जिसमें पांच पैकेटों में 488 नई खाली शीशी बिना ढक्कन, 110 रैपर, 1,939 ढक्कन, स्प्रिट भरी तीन शीशियां, आरेंज फ्लेवर की एक शीशी और एक छोटा गैस सिलिंडर, सामग्री और बाइक बरामद को बरामद कर लिया। आरोपित के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी पंजीकृत की गई।

पूछताछ में आरोपित ने कुबूल किया कि उसने वर्ष 2003 में सिटी अस्पताल में कंपाउडर का कार्य किया था। करीब तीन वर्ष कार्य करने के बाद अपने गांव आकर लोगों को जुकाम, बुखार व खांसी की दवाइयां देने के लिए अवैध रूप से क्लीनिक खोल दिया। इसके अलावा शाहजहांपुर जिले के खुटार थाना क्षेत्र के गांव मझगंवा में भी क्लीनिक चलाना शुरू कर दिया। इससे अच्छी-खासी कमाई होने लगी।

दवाओं में सबसे ज्यादा कफ सिरप खपत होने पर नकली कफ सिरप बनाने का सोचा। करीब दो वर्ष पहले यू-ट्यूब से जानकारी लेकर घर पर ही नकली कफ सिरप बनाना शुरू कर दिया। कफ सिरप को स्प्रिट, आरेंज फ्लेवर नंबर-1, डीएक्स सिरप के घोल और शीरे का प्रयोग किया। इसके बाद बरेली जिले से खाली शीशियां व ढक्कन मंगवाए।

छोटे गैस सिलिंडर की सहायता से 20 शीशियों की लेमिनेशन युक्त पैकिंग कर उन्हें असली जैसा रूप देकर बिक्री करना शुरू कर दिया। इसके अलावा कोरेक्स कफ सिरप की बिक्री बंद होने के कारण उसने टोपेक्स गोल्ड और कोयोरेक्स-टी के रैपर जैसी छपाई कराई। इन कफ सिरप की पेटियों को साई मेडिकल स्टोर पूरनपुर, गिरिराज मेडिकल स्टोर पूरनपुर और उमापति मंडल को बेंचता था।

गांव-कस्बों में नशेड़ियों को 80 से 100 रुपये प्रति शीशी के हिसाब से बिक्री करता था, जबकि 10 शीशियां कफ सिरप को बनाने में 75 से 80 रुपये का खर्च आता था, जो 800 रुपये में बिक जाती थीं। उसने बताया कि वह एक बार में लगभग 350 शीशियां तैयार करता था और बिक्री पूरी होने पर दूसरी खेप तैयार करता था। अब तक करीब पांच से नौ से 10 हजार शीशी बनाकर बिक्री कर चुका है।

किन धाराओं में प्राथमिकी

धोखाधड़ी, ट्रेडमार्क एक्ट, औषधि में मिलावट की धाराओं में पंजीकृत कर ली। पुलिस ने आरोपित को जेल भेज दिया गया। सीओ पूरनपुर प्रतीक दहिया, इंस्पेक्टर जयशंकर सिंह, एसआइ विजयवीर सिंह, एसआइ महेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल चंद्रपाल सिंह, कांस्टेबल शोभित कुमार, डब्बू बैसोया मौजूद रहें।


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