सिस्टम की क्रूरता! ऑक्सीजन पर था मासूम, लाइट जाते ही नहीं चलाया जनरेटर; तड़प-तड़प कर नवजात की मौत
पीलीभीत के बरखेड़ा सीएचसी में बिजली गुल होने पर जनरेटर न चलाने से एक नवजात की ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित हो ...और पढ़ें

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बरखेड़ा, पीलीभीत
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। बत्ती गुल होने से यूं तो रोज कहीं न कहीं लोगों के छोटे-मोटे नुकसान हो जाता है, लेकिन रविवार रात ऐसा हुआ जो सोचकर भी मन आक्रोश से भर जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव होने के बाद आवश्यकतानुसार नवजात को आक्सीजन लगाकर रखा गया। इसी बीच बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है, लेकिन संवेदनशून्य और लापरवाह स्वास्थ्य कर्मचारी जनरेटर नहीं चलाते हैं, जिससे बच्चे के मुंह पर मास्क तो लगा होता है, लेकिन उसको आक्सीजन नहीं मिल पाती है।
इससे बच्चे की मृत्यु हो जाती है। एक घर का चिराग जलने से पहले ही बुझ जाता है। सरकारी अस्पताल के कुप्रबंधन के कारण एक नवजात शिशु को अपनी जान गंवानी पड़ी। पीड़ित पिता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को शिकायती पत्र सौंपकर दोषी स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सीएमओ ने मामने की जांच करके रिपोर्ट भेजने के निर्देश सीएचसी प्रभारी को ही सौंप दी।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव जिओरहा कल्यानपुर निवासी सुनील कुमार ने अपनी पत्नी गीता देवी को प्रसव के लिए 19 अप्रैल की रात लगभग नौ बजे बरखेड़ा सीएचसी में भर्ती कराया। सुनील का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स मधु भारती और निशा ने मरीज की सही ढंग से देखभाल नहीं की। प्रसूता दर्द से तड़प रही थी, जिसका कोई असर अस्पताल के कर्मचारियों पर नहीं था।
स्वजन ने पूछताछ व जानकारी करने के लिए कई बार पूछा भी, लेकिन उनको अंदर तक नहीं जाने दिया गया। मरीज की स्थिति बिगड़ने पर उसको कहीं और रेफर भी नहीं किया। रात 2.03 बजे प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया, जिसका वजन 2.8 किलोग्राम था। पहला बच्चा होने पर प्रसूता अपना दर्द भूल गई और बेटे की जन्म की बात सुनकर पिता की खुशियों को ठिकाना न रहा।
मगर उनको नहीं पता था कि उनकी यह खुशियां अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से मातम में बदल जाएंगीं। आरोप है कि स्टाफ ने प्रसूता के पति सुनील कुमार से प्रसव के बाद होने वाली साफ-सफाई का काम करवाया। इसके बाद बच्चे को नार्मल रखने के लिए प्रसव के बाद नवजात शिशु को आक्सीजन लगा दी गई थी, लेकिन पांच मिनट बाद ही अस्पताल की बिजली कट गई।
जब स्वजन ने आक्सीजन की सप्लाई सुचारू बनाए रखने के लिए जनरेटर चलाने की गुहार लगाई, तो स्टाफ ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जनरेटर की व्यवस्था नहीं है और न ही बच्चे को समय रहते किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया। आक्सीजन की कमी के चलते नवजात शिशु ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।
शोक संतप्त परिवार ने इस घटना को 'घोर लापरवाही' करार देते हुए प्रशासन से न्याय की अपील की है। सुनील कुमार ने शिकायती पत्र देकर मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाए और दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।
प्रभारी चिकित्सक डा. लोकेश ने बताया कि पीड़ित की शिकायती पत्र मिला है। मामले की जांच करके ही कुछ कहा जा सकता है। मामला सीएमओ के संज्ञान में पहुंचा तो उन्होंने सीएचसी प्रभारी से रिपोर्ट तलब की है।्
बरखेड़ा सीएचसी के प्रभारी से बच्चे की मृत्यु होने के मामले में प्राथमिकी रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच करने के लिए टीम गठित की जाएगी।
- डा. आलोक कुमार, सीएमओ
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