चाचा की दुकान पर सीखी नशे की एबीसीडी, फिर नेपाल और पंजाब तक बिछा दिया अवैध दवाओं का साम्राज्य!
पीलीभीत में तारिक खान ने अपने चाचा के मेडिकल स्टोर से नशीली दवाओं का कारोबार सीखा और कुछ ही सालों ...और पढ़ें

पूरनपुर पुलिस की गिरफ्त में नशीले पदार्थ बिक्री का आरोपित। जागरण
HighLights
औषधि टीम दवाओं के बैच की जांच करके विक्रेता के बारे में जुटा रही जानकारी
नारकोटिक्स दवाएं बिक्री करने के नेटवर्क की तलाश करने में जुटा पुलिस प्रशासन
पीयूष दुबे, पीलीभीत। नशीली दवाओं की अवैध खरीद-बिक्री के आरोपित गिरोह का सरगना तारिक खान कुछ वर्षों में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया। पुलिस के अनुसार, उसने चाचा साजिद के मेडिकल स्टोर पर काम करते हुए नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री और इससे होने वाले मुनाफे का तरीका सीखा।
फिर उसने यह कारोबार बड़े स्तर पर शुरू किया। तारिक का नेटवर्क पीलीभीत जिले के पूरनपुर और माधोटांडा के अलावा नेपाल, पंजाब और उत्तराखंड तक फैला बताया जा रहा है। पुलिस इसकी जांच कर रही है।
पुलिस को गोदाम से स्पासमो (डाइसाइक्लोमाइन एचसीएल, ट्रामाडोल हाइड्रोक्लाइड्स और एसिटामिनोफेन कैप्सूल ब्ल्यू व ब्राउन) की 10 एमजी, 50 एमजी और 325 एमजी की दवाएं मिलीं।
स्पासमेड ब्ल्यू व ब्राउन के 43 गत्ते भी बरामद हुए। औषधि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आरोपितों के पास दवाएं रखने, खरीदने और बेचने का लाइसेंस नहीं था।
पुलिस के मुताबिक, पूरनपुर मंडी के पास सड़क किनारे बाइक पर गत्ता बांधकर ले जा रहे दानिश खान निवासी मुहल्ला जामा मस्जिद, माधोटांडा को पकड़ा गया। गत्ते की तलाशी में स्पासमो के 27 कार्टन मिले।
प्रत्येक कार्टन में 240 कैप्सूल थे और पैक साइज 1,038 था। दानिश के पास दवाओं से जुड़े कोई अभिलेख नहीं मिले। उसने पुलिस को बताया कि उसके बड़े भाई तारिक खान ने गोदाम से गत्ता माधोटांडा मेडिकल स्टोर पहुंचाने को कहा था।
इसके बाद पुलिस ने मंडी गेट-1 के सामने वाली गली में स्थित दो मंजिला मकान के गोदाम पर छापा मारा, जहां प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा मिला। लाखों रुपये की दवाएं बिना लाइसेंस कहां से खरीदी गईं और कहां बेची जानी थीं, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, तारिक पहले माधोटांडा में अपने चाचा साजिद के भारत मेडिकल स्टोर पर बैठता था। वहां कई बार छापे पड़े और स्टोर सील भी हुआ। एक बार स्टोर से भारी मात्रा में नारकोटिक्स बरामद होने के बाद साजिद को जेल भेजा था।
आरोप है कि तारिक ने वहीं इस कारोबार के तौर-तरीके सीखे और बाद में अलग मेडिकल स्टोर खोलकर नशीली दवाओं का कारोबार शुरू किया। चर्चा है कि चाचा-भतीजे मिलकर यह कारोबार कर रहे थे और कुछ वर्षों में करोड़ों की संपत्ति जुटाई।
परिवार के अन्य लोगों के नाम पर भी कई जगह दुकानें और महंगे प्लाट खरीदे गए तथा उनके खातों में करोड़ों रुपये जमा किए गए। पुलिस इन पहलुओं और आरोपित के नेटवर्क की जांच कर रही है।
एसपी सुकीर्ति माधव ने कहा कि पुलिस यह पता लगा रही है कि दवाओं की आपूर्ति किन जिलों और राज्यों में की जा रही थी। औषधि विभाग की टीम दवाओं के बैच की जांच कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में नारकोटिक्स दवाएं कहां से खरीदी गईं और कहां बेची जानी थीं।
