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पीलीभीत में बाघों के बाद अब तेंदुओं की दहशत: ग्रामीणों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरेगी 'बाघ एक्सप्रेस'

Published: Fri, 21 Aug 2026 07:24 PM (IST)

पीलीभीत में बाघों के बाद अब तेंदुओं की बढ़ती चहलकदमी से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ गया है। ग्रामीणों को जागरूक करने ...और पढ़ें

तेंदुआ

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HighLights

  1. पीटीआर प्रशासन ने लिया निर्णय

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। अपनी अद्भुत प्राकृतिक छटा और वन्यजीवों के लिए विख्यात पीलीभीत में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक नया रूप सामने आ रहा है। आमतौर पर यहां आबादी के करीब बाघों की चहलकदमी सुर्खियों में रहती है। लेकिन बीते कुछ दिनों से जिले के कई इलाकों में तेंदुओं ने दस्तक दे दी है। इस चुनौती से निपटने और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पीटीआर प्रशासन ने एक बार फिर अपनी बाघ एक्सप्रेस चलाने का निर्णय लिया है।

बीते कुछ दिनों से पूरनपुर, अमरिया, कलीनगर, बरखेड़ा और बिलसंडा समेत कई क्षेत्रों में तेंदुओं की आवाजाही देखी जा रही है। कुछ इलाकों को छोड़ दें तो अधिकांश गांव ऐसे हैं, जहां पहले कभी हिंसक वन्यजीव नहीं देखे गए थे। इन इलाकों के बाशिंदों के लिए यह परिस्थितियां बिल्कुल नई हैं।

ग्रामीण इस बात से अनजान हैं कि तेंदुए का सामना होने पर कैसे बचाव करना चाहिए। वन्यजीवों के स्वभाव से अपरिचित होने के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। जिससे किसी भी अप्रिय घटना या अकारण संघर्ष की आशंका काफी बढ़ गई है।

इस स्थिति को देखते हुए पीटीआर प्रशासन एक पहल शुरु करने जा रहा है। जिन क्षेत्रों में तेंदुओं की चहलकदमी देखी गई है, वहां बाघ एक्सप्रेस भेजी जाएगी। बाघ एक्सप्रेस नामक वैन अत्याधुनिक आडियो-विजुअल उपकरणों और एलईडी स्क्रीन से लैस है।

इसके माध्यम से गांवों में लघु फिल्में, नुक्कड़ नाटक के वीडियो और आडियो संदेश प्रसारित किए जाएंगे। गौरतलब है कि पूर्व में जब बाघों के आबादी में आने की घटनाएं बढ़ी थीं। तब भी इस प्रयास ने लोगों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई थी।

जागरूकता के इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा फोकस

बाघ एक्सप्रेस के जरिए वन विभाग की टीम ग्रामीणों को कई अहम सावधानियां बरतने के लिए जागरूक करेगी। ग्रामीणों को सलाह दी जाएगी कि वे खेतों में काम करने या बाहर जाते समय अकेले न निकलें, बल्कि हमेशा समूह में लाठी-डंडा लेकर और बातचीत करते या शोर मचाते हुए जाएं।

रात के समय घरों के आसपास पर्याप्त रोशनी रखने और बच्चों को अकेला न छोड़ने की हिदायत दी जाएगी। चूंकि तेंदुए अक्सर कुत्तों, बकरियों और बछड़ों का शिकार करने बस्तियों में आते हैं।

इसलिए पालतू जानवरों को सुरक्षित व बंद बाड़े में ही बांधने के लिए जागरुक किया जाएगा। साथ ही, ग्रामीणों को समझाया जाएगा कि तेंदुआ दिखने पर उसे घेरने, डराने या भगाने का प्रयास बिल्कुल न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या पुलिस को इसकी सूचना दें।

 

कई बार वन्यजीव आबादी के क्षेत्रों में पहुंच जाते है। अधिकांश मामलों में जागरुकता के माध्यम से संघर्ष की परिस्थितियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी को देखते हुए चहलकदमी वाले क्षेत्रों में बाघ एक्सप्रेस कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। अभी यह वैन दूसरे जिले में है। इसे जल्द ही पीलीभीत के प्रभावित क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा।

- मनीष सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर

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