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₹1 करोड़ का पुल बना मुसीबत! सड़क पर बही माला नदी, वाहनों के साथ मंडरा रहा मगरमच्छ का खतरा

Published: Wed, 30 Sep 2026 10:08 PM (IST)

पीलीभीत के गजरौला कलां में माला नदी का पानी लोहिया पुल के पास सड़क पर बह रहा है, जिससे सैकड़ों ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सौ मीटर क्षेत्र में जलभराव, बाइक और बड़े वाहन पानी में फंस रहे, मगरमच्छ की दस्तक से भी दहशत

संवाद सूत्र, गजरौला कलां (पीलीभीत)। क्षेत्र में माला नदी पर बने लोहिया पुल के पास पिंडरा मार्ग पर माला नदी का पानी सड़क के ऊपर बहने लगा है। सौ मीटर तक सड़क पर जलभराव होने से सैकड़ों गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

पानी की गहराई अधिक होने के कारण बाइक और बड़े वाहन भी आधे से अधिक पानी में डूबते हुए निकल रहे हैं। कई दोपहिया वाहन खराब होने की भी जानकारी मिली है।

यह मार्ग पेंड्रा, बैजूनगर, बिधीपुर, लालपुर, शिवनगर, इटौरिया, बिहारीपुर, बकैनिया, शेरगंज, नौगवां और पालिया माफी समेत सैकड़ों गांवों को जोड़ता है।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, स्कूली बच्चे, बाइक सवार, ट्रैक्टर-ट्राली और अन्य वाहन इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। सड़क पर पानी आने से सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों और किसानों को हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि लोहिया पुल के पास सड़क का हिस्सा अपेक्षाकृत नीचे है, जिससे माला नदी का पानी सड़क पर बह रहा है। उनका आरोप है कि यदि पुल को उचित ऊंचाई पर बनाया जाता और पानी की निकासी के लिए उचित पुलिया या कलवर्ट की व्यवस्था होती, तो सड़क पर इस तरह पानी नहीं भरता।

पुल का निर्माण करीब दो वर्ष पूर्व एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने लोहिया पुल की जगह ईंटों से पुल का निर्माण कराया गया, लेकिन जल निकासी की समस्या का समाधान नहीं हो सका। उन्होंने पुल और सड़क के निर्माण की गुणवत्ता तथा लागत की जांच कराने की मांग की है।

माला नदी में पानी बढ़ने के साथ ही पुल और सड़क के आसपास मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना से ग्रामीणों में भय का माहौल है। आसपास जंगल का क्षेत्र होने के कारण लोग और अधिक सतर्क हैं।

इसके बावजूद कुछ लोग मगरमच्छ देखने और वीडियो बनाने के लिए पुल के पास पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के बीच से वाहनों और लोगों का निकलना पहले ही जोखिम भरा है, ऐसे में मगरमच्छ की मौजूदगी चिंता को बढ़ा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। किसानों को ट्रैक्टर-ट्राली से गन्ना, धान और अन्य कृषि उपज लेकर इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। पानी भरने के कारण वाहनों को निकलने में काफी परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से माला नदी के पानी की निकासी की तत्काल व्यवस्था कराने, सड़क को ऊंचा करने, पुल को पर्याप्त ऊंचाई पर बनाने और आवश्यक स्थान पर पुलिया या कलवर्ट निर्माण कराने की मांग की है।

उन्होंने एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने पुल के निर्माण कार्य की जांच कराने की भी मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह मार्ग पूरी तरह बंद हो सकता है, जिससे सैकड़ों गांवों का आवागमन प्रभावित होगा और हादसे का खतरा भी बढ़ सकता है।

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