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141 साल से रावण के पुतले से चल रही इस परिवार की रोजी-रोटी, अब 'भरत' ने संभाली कमान

Published: Tue, 20 Oct 2026 06:37 PM (IST)

पीलीभीत का एक परिवार 141 वर्षों से रावण के पुतले बनाने की अपनी पारंपरिक विरासत को निभा रहा है। अब ...और पढ़ें

पीलीभीत रामलीला में रावण का पुतला बनाते कारीगर। जागरण

पीलीभीत रामलीला में रावण का पुतला बनाते कारीगर। जागरण 

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। दशहरा आते ही बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। रावण का पुतला हर साल जलकर राख हो जाता है, लेकिन उसे बनाने की परंपरा पीलीभीत में एक परिवार 141 वर्षों से निभाता आ रहा है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस विरासत ने परिवार को एक अलग पहचान दी है।

खास बात यह है कि अब इस परंपरा की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के भरत ने संभाल ली है। पीलीभीत में रावण का पुतला बनाने वाले इस परिवार के लिए यह महज कारोबार नहीं, बल्कि पूर्वजों से मिली विरासत है।

हर साल रामलीला और दशहरा के अवसर पर रावण दहन के लिए पुतला तैयार किया जाता है। समय बदलता रहा, पीढ़ियां आगे बढ़ती रहीं, लेकिन परिवार ने अपने पारंपरिक काम को नहीं छोड़ा।

यही वजह है कि 141 साल बाद भी यह सिलसिला लगातार जारी है। इस बार परिवार की ओर से 51 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है। पुतले को आकर्षक और भव्य रूप देने के लिए मेहनत की जा रही है।

हर साल की तरह इस बार भी दशहरा उत्सव में रावण दहन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। पुतला तैयार करने में लगने वाली लागत में भी बढ़ोतरी हुई है।

पिछले साल रावण का पुतला बनाने में करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए थे, जबकि इस बार इसकी लागत बढ़कर लगभग 30 हजार रुपये पहुंच गई है।

रावण का पुतला हर साल जलाया जाता है, लेकिन उसे बनाने वाले परिवार की परंपरा खत्म होने का नाम नहीं ले रही। नई पीढ़ी के भरत ने इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालकर संदेश दिया कि परंपराएं केवल यादों में नहीं, बल्कि उन्हें निभाने से जीवित रहती हैं।

इस परिवार के लिए रावण दहन का पर्व सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि 141 वर्षों से चली आ रही मेहनत, हुनर और पारिवारिक विरासत को संजोने का अवसर भी है।

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